Answer By law4u team
हाँ, हाई कोर्ट या सेशंस कोर्ट से मिली एंटीसिपेटरी बेल आम तौर पर पूरे भारत में वैलिड होती है, लेकिन इसमें कुछ ज़रूरी कानूनी बातें हैं। 1. बेसिक कानूनी स्थिति एंटीसिपेटरी बेल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (पहले CrPC) के सेक्शन 438 के तहत दी जाती है। एक बार इनसे मिलने के बाद: हाई कोर्ट, या सेशंस कोर्ट यह उस व्यक्ति को उस खास मामले में गिरफ्तारी से बचाता है, और यह सुरक्षा पूरे भारत में लागू होती है। 2. सभी राज्यों में प्रैक्टिकल असर अगर किसी व्यक्ति को एक राज्य में एंटीसिपेटरी बेल मिलती है: भारत के किसी भी हिस्से की पुलिस उस मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती उन्हें बेल ऑर्डर का सम्मान करना होगा तो इस मायने में, इसका पूरे देश में असर होता है। 3. सीमाएं (ज़रूरी) हालांकि: ऑर्डर केस-स्पेसिफिक है (सिर्फ़ उस FIR या अपराध के लिए) यह नए केस या अलग FIR पर लागू नहीं होता आरोपी को कोर्ट की लगाई गई शर्तों का पालन करना होगा 4. अगर FIR दूसरे राज्य में है भले ही FIR दूसरे राज्य में हो: उस राज्य का हाई कोर्ट या कोई दूसरा सक्षम हाई कोर्ट एंटीसिपेटरी बेल दे सकता है कुछ कोर्ट सही कोर्ट में जाने के लिए समय देने के लिए “ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल” देते हैं 5. सुप्रीम कोर्ट का रुख सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि तथ्यों के आधार पर एंटीसिपेटरी बेल का पूरे भारत में असर हो सकता है, लेकिन कोर्ट को अधिकार क्षेत्र पक्का करना चाहिए और फोरम शॉपिंग से बचना चाहिए। 6. खास बातें एक ही केस/FIR के लिए पूरे भारत में वैलिड भविष्य के सभी केस के लिए पूरी सुरक्षा नहीं शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा संक्षेप में: हां, एंटीसिपेटरी बेल उस खास केस के लिए पूरे भारत में वैलिड है जिसमें यह दी गई है, और भारत में कहीं भी पुलिस को इसका सम्मान करना चाहिए, लेकिन यह सभी क्रिमिनल केस से यूनिवर्सल या लाइफटाइम सुरक्षा नहीं है।