Answer By law4u team
भारत में, स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत कोर्ट मैरिज के लिए आमतौर पर मेडिकल सर्टिफिकेट ज़रूरी नहीं होता है। 1. बेसिक कानूनी ज़रूरत कोर्ट मैरिज के लिए, कानून में मुख्य रूप से ये चीज़ें ज़रूरी हैं: उम्र का सबूत (दुल्हन के लिए 18 साल, दूल्हे के लिए 21 साल) सही सहमति देने की मेंटल कैपेसिटी दोनों में से कोई भी पहले से शादीशुदा न हो (जब तक कि कानूनी तौर पर तलाकशुदा या विधवा न हो) दोनों पार्टियों की अपनी मर्ज़ी से सहमति ज़्यादातर मामलों में मेडिकल सर्टिफिकेट कानूनी ज़रूरत नहीं है। 2. मेडिकल सर्टिफिकेट कब मांगा जा सकता है (बहुत कम मामलों में) कुछ मामलों में मेडिकल सर्टिफिकेट की ज़रूरत पड़ सकती है या उसकी रिक्वेस्ट की जा सकती है, जैसे: मेंटल फिटनेस या सहमति देने की कैपेसिटी पर शक विवादित या सेंसिटिव मामलों में कोर्ट का निर्देश कुछ लोकल ऑफिस में खास एडमिनिस्ट्रेटिव प्रैक्टिस (पूरे भारत में एक जैसी नहीं) विकलांगता या गार्जियनशिप से जुड़े खास हालात 3. ज़रूरी कानूनी सिद्धांत भारतीय मैरिज कानून इन पर फोकस करता है: लीगल कैपेसिटी सहमति उम्र फिजिकल हेल्थ सर्टिफिकेशन पर नहीं। 4. असलियत ज़्यादातर कोर्ट मैरिज में: कोई मेडिकल टेस्ट या सर्टिफिकेट नहीं मांगा जाता सिर्फ़ पहचान, उम्र, पता और मैरिटल स्टेटस के डॉक्यूमेंट्स वेरिफ़ाई किए जाते हैं 5. खास बातें भारत में आम हालात में कोर्ट मैरिज के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं होती। इसकी ज़रूरत सिर्फ़ खास या विवादित मामलों में होती है, जहाँ मैरिज ऑफिसर या कोर्ट मेंटल कैपेसिटी या कानूनी योग्यता पर शक होने पर खास तौर पर इसका ऑर्डर देता है।