जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य (2005) का निर्णय भारत में चिकित्सा लापरवाही पर सर्वोच्च न्यायालय का एक ऐतिहासिक निर्णय है। मुख्य महत्व • आपराधिक अभियोजन के लिए उच्च सीमा – न्यायालय ने माना कि आपराधिक कानून (अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत) के तहत किसी डॉक्टर पर मुकदमा चलाने के लिए, लापरवाही गंभीर या लापरवाह होनी चाहिए; साधारण गलतियाँ या निर्णय संबंधी त्रुटियाँ पर्याप्त नहीं हैं। • बोलम परीक्षण को अपनाना – न्यायालय ने पुनः पुष्टि की कि यदि किसी डॉक्टर के कार्य उस विशेषज्ञता में चिकित्सा पेशेवरों के एक जिम्मेदार निकाय द्वारा उचित मानी जाने वाली कार्यप्रणाली के अनुरूप हैं, तो वह लापरवाह नहीं है। • तुच्छ शिकायतों के विरुद्ध सुरक्षा – इसने निर्देश दिया कि किसी डॉक्टर के विरुद्ध आपराधिक आरोप दायर करने से पहले, लापरवाही के आरोप का समर्थन करने वाली एक विश्वसनीय स्वतंत्र चिकित्सा राय होनी चाहिए। • रोगी अधिकारों और डॉक्टर सुरक्षा में संतुलन - यह निर्णय सुनिश्चित करता है कि स्पष्ट, गंभीर लापरवाही से पीड़ित मरीजों को न्याय मिल सके, जबकि डॉक्टरों को सद्भावनापूर्वक किए गए वास्तविक प्रयासों के लिए उत्पीड़न से बचाया जा सके।
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