Answer By law4u team
रिकॉर्ड ऑफ़ राइट्स (ROR) एक आधिकारिक ज़मीन का रिकॉर्ड दस्तावेज़ है जिसे राजस्व विभाग द्वारा रखा जाता है। यह दस्तावेज़ दिखाता है कि ज़मीन के किसी टुकड़े का मालिक कौन है और उस ज़मीन से जुड़े क्या अधिकार हैं। भारत में, यह राज्य के राजस्व कानूनों के तहत ज़मीन के प्रशासन का एक अहम हिस्सा है। इसे ज़मीन की मालिकाना हक और कब्ज़े के प्राथमिक सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, हालाँकि यह हमेशा मालिकाना हक का पक्का सबूत नहीं होता। ROR में आम तौर पर ज़मीन के मालिक का नाम, सर्वे नंबर, ज़मीन की जगह, ज़मीन का प्रकार (खेती वाली या गैर-खेती वाली), और ज़मीन का क्षेत्रफल जैसी ज़रूरी जानकारी शामिल होती है। इसमें किराएदारों, खेती करने वालों, गिरवी रखी ज़मीन, कर्ज़, या ज़मीन पर किसी भी तरह के कानूनी बोझ (encumbrances) की जानकारी भी हो सकती है। इसे राज्य के राजस्व अधिकारी (आम तौर पर तहसीलदार या तलाठी स्तर के दफ़्तर) रखते और अपडेट करते हैं, और यह भारत में ज़मीन के आधिकारिक रिकॉर्ड सिस्टम का एक हिस्सा है। जब भी ज़मीन की बिक्री, विरासत, बँटवारे, या अदालत के आदेश की वजह से मालिकाना हक में कोई बदलाव होता है, तो ROR को 'म्यूटेशन' (mutation) नाम की प्रक्रिया के ज़रिए अपडेट किया जाता है। रिकॉर्ड ऑफ़ राइट्स का मुख्य मकसद ज़मीन के मालिकाना हक में पारदर्शिता लाना और ज़मीन से जुड़े झगड़ों को रोकना है। इसका इस्तेमाल आम तौर पर ज़मीन की बिक्री, कर्ज़ के लिए आवेदन करने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, और ज़मीन की कानूनी स्थिति की जाँच करने जैसे कामों में किया जाता है। संक्षेप में, रिकॉर्ड ऑफ़ राइट्स सरकार द्वारा रखा जाने वाला एक रजिस्टर है जो ज़मीन पर मालिकाना हक और कानूनी अधिकारों को दिखाता है। भारत में ज़मीन से जुड़े दावों को साबित करने और उनकी जाँच करने में यह एक बहुत ही अहम भूमिका निभाता है।