Answer By law4u team
हाँ, भारत में कोई भी महिला FIR दर्ज किए बिना भी घरेलू हिंसा से राहत का दावा कर सकती है। 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' के तहत मिलने वाली राहत आपराधिक FIR की कार्यवाही से पूरी तरह अलग होती है। यह कानून एक नागरिक संरक्षण कानून है, न कि पुलिस FIR प्रक्रिया की तरह कोई आपराधिक शिकायत प्रणाली। FIR के बिना राहत का दावा कैसे करें कोई भी महिला सीधे तौर पर: मजिस्ट्रेट कोर्ट में आवेदन दायर कर सकती है। इस अधिनियम के तहत नियुक्त किसी संरक्षण अधिकारी से संपर्क कर सकती है। कानूनी सहायता सेवाओं या NGOs से मदद मांग सकती है। इसके बाद, कोर्ट शिकायत के आधार पर सुरक्षा आदेश, निवास आदेश, आर्थिक राहत और अन्य उपाय (remedies) जारी कर सकता है। FIR का उपयोग किसलिए होता है आमतौर पर, FIR भारतीय दंड संहिता / भारतीय न्याय संहिता के तहत निम्नलिखित जैसे आपराधिक अपराधों के लिए दर्ज की जाती है: हमला (Assault) क्रूरता दहेज उत्पीड़न (जहाँ लागू हो) लेकिन घरेलू हिंसा कानून के तहत सुरक्षा पाने के लिए FIR दर्ज करना अनिवार्य नहीं है। FIR के बिना कोर्ट क्या कर सकता है पुलिस FIR न होने पर भी, कोर्ट निम्नलिखित कदम उठा सकता है: तत्काल सुरक्षा आदेश जारी करना। निवास का अधिकार प्रदान करना। भरण-पोषण या आर्थिक राहत उपलब्ध कराना। बच्चों की कस्टडी (अस्थायी तौर पर) देना। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस सहायता का निर्देश देना। महत्वपूर्ण बिंदु घरेलू हिंसा अधिनियम (DV Act) को त्वरित नागरिक राहत और सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है, इसलिए इसके तहत राहत पाने के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू होना ज़रूरी नहीं है। संक्षेप में हाँ, कोई भी महिला FIR दर्ज किए बिना भी घरेलू हिंसा से पूरी तरह राहत मांग और पा सकती है; इसके लिए वह 'घरेलू हिंसा अधिनियम' के तहत सुरक्षा और आर्थिक उपायों के लिए सीधे कोर्ट से संपर्क कर सकती है।