Answer By law4u team
भारतीय कानून के तहत, कोई भी व्यक्ति जिसे यह उचित आशंका हो कि उसे किसी गैर-जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है, वह भारतीय संसद के 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023' की धारा 482 (पहले CrPC की धारा 438) के तहत अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। कौन पात्र है? कोई व्यक्ति तब आवेदन कर सकता है, यदि: उसे लगता है कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है, कथित अपराध गैर-जमानती है, FIR पहले ही दर्ज हो चुकी है या जल्द ही दर्ज होने वाली है, उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। आमतौर पर किसे अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती? आम तौर पर, अदालतें ऐसे मामलों में सतर्क या सख्त रवैया अपनाती हैं जिनमें शामिल हैं: अत्यंत गंभीर अपराध (आतंकवाद, NDPS के कुछ अपराध, आदि), कुछ विशेष कानून जो स्पष्ट रूप से अग्रिम जमानत पर रोक लगाते हैं, ऐसे मामले जहाँ हिरासत में पूछताछ (custodial interrogation) को आवश्यक माना जाता है। इसे कहाँ दायर किया जा सकता है? आवेदन निम्नलिखित के समक्ष दायर किया जा सकता है: सत्र न्यायालय (Sessions Court), या उच्च न्यायालय (High Court)। अदालतें किन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार करती हैं? अदालतें आमतौर पर निम्नलिखित की जाँच करती हैं: आरोपों की गंभीरता, आपराधिक इतिहास, फरार होने की संभावना, सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को धमकाने की संभावना, क्या आरोप दुर्भावनापूर्ण या झूठे प्रतीत होते हैं। लगाई जाने वाली सामान्य शर्तें यदि जमानत मंजूर हो जाती है, तो अदालत उस व्यक्ति को निम्नलिखित निर्देश दे सकती है: जाँच में सहयोग करे, बुलाए जाने पर पुलिस के समक्ष उपस्थित हो, बिना अनुमति के भारत छोड़कर न जाए, गवाहों को प्रभावित न करे।