Answer By law4u team
जब किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के सेक्शन 35 के तहत नोटिस मिलता है, तो इसका आम तौर पर मतलब होता है कि पुलिस उन्हें तुरंत अरेस्ट करने के बजाय पूछताछ या इन्वेस्टिगेशन के लिए पेश होने के लिए कह रही है। आपको क्या करना चाहिए: नोटिस को ध्यान से पढ़ें तारीख, समय, पुलिस स्टेशन और पेश होने का कारण चेक करें। नोटिस को इग्नोर न करें न मानने पर पुलिस सख्त एक्शन ले सकती है, जिसमें कुछ मामलों में अरेस्ट भी शामिल है। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के सामने पेश हों दी गई तारीख पर जाएं या अगर सच में ज़रूरत हो तो सही एक्सटेंशन के लिए रिक्वेस्ट करें। अपने साथ एक वकील ले जाएं पूछताछ के दौरान आपको कानूनी मदद पाने का अधिकार है। ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स साथ रखें आइडेंटिटी प्रूफ आपके वर्जन को सपोर्ट करने वाला कोई भी सबूत केस से जुड़े मैसेज, रसीदें या रिकॉर्ड सिर्फ़ फैक्ट्स के आधार पर जवाब दें अंदाज़ा न लगाएं या गलत बयान न दें। आपको भारत के संविधान के आर्टिकल 20(3) के तहत खुद को दोषी ठहराए जाने के खिलाफ अधिकार है। अपने स्टेटमेंट की कॉपी मांगें पक्का करें कि आपका स्टेटमेंट सही तरीके से रिकॉर्ड किया गया है। ज़रूरी कानूनी बातें: सेक्शन 35 BNSS पुलिस को कई मामलों में अरेस्ट करने के बजाय नोटिस जारी करने की इजाज़त देता है। इसका इस्तेमाल आमतौर पर तब किया जाता है जब: जुर्म बहुत सीरियस न हो तुरंत अरेस्ट ज़रूरी न हो आरोपी कोऑपरेट कर रहा हो कब सावधान रहें: अगर आरोप सीरियस हों, तो जवाब देने से पहले किसी क्रिमिनल लॉयर से सलाह लें। बिना पढ़े कोरे कागज़ों या डॉक्यूमेंट्स पर साइन न करें। अगर आप बात नहीं मानते हैं: पुलिस इसे नॉन-कोऑपरेशन मान सकती है। कुछ स्थितियों में इसे अरेस्ट के लिए ग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।