Answer By law4u team
हाँ, भारत में साइबर स्टॉकिंग एक सज़ा वाला अपराध है। यह इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 और भारतीय न्याय संहिता के तहत आता है। साइबर स्टॉकिंग का मतलब: किसी व्यक्ति को ऑनलाइन बार-बार फॉलो करना, मॉनिटर करना या परेशान करना, इन तरीकों से: सोशल मीडिया ईमेल मैसेजिंग ऐप फेक प्रोफाइल डिजिटल ट्रैकिंग या जासूसी टूल आम उदाहरण: बार-बार अनचाहे मैसेज या कॉल किसी को परेशान करने के लिए फेक अकाउंट बनाना बिना सहमति के किसी की ऑनलाइन एक्टिविटी पर नज़र रखना धमकी भरा या अश्लील कंटेंट भेजना साइबरबुलिंग या ऑनलाइन परेशान करना सजा: गंभीरता के आधार पर कई साल तक की जेल जुर्माना या जेल और जुर्माना दोनों गंभीर मामले (ज़्यादा गंभीर): महिलाओं या नाबालिगों को टारगेट करना हिंसा की धमकी चेतावनी के बावजूद लगातार परेशान करना पहचान का गलत इस्तेमाल या ब्लैकमेल पीड़ित ये कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं: पुलिस या साइबर क्राइम सेल में साइबर शिकायत दर्ज करें साइबर कानूनों और क्रिमिनल लॉ के नियमों के तहत FIR दर्ज करें अकाउंट ब्लॉक करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें स्क्रीनशॉट, चैट, URL और जैसे सबूत संभालकर रखें ईमेल पुलिस की पावर: IP एड्रेस और डिवाइस ट्रैक करना इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ज़ब्त करना नकली अकाउंट और डिजिटल फुटप्रिंट का पता लगाना निष्कर्ष: हाँ, साइबर स्टॉकिंग भारत में एक गंभीर क्रिमिनल ऑफेंस है और साइबर और क्रिमिनल कानूनों के तहत इसके लिए जेल और जुर्माना हो सकता है।