Answer By law4u team
हां, कभी-कभी आवेदक के कोर्ट में खुद पेश हुए बिना भी एंटीसिपेटरी बेल दी जा सकती है, लेकिन यह कोर्ट के फैसले और प्रोसेस पर निर्भर करता है। 1. आम नियम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के सेक्शन 438 के तहत एंटीसिपेटरी बेल आमतौर पर एक वकील के ज़रिए फाइल की जाती है एप्लीकेंट (आरोपी) को हमेशा पहली सुनवाई में खुद मौजूद रहने की ज़रूरत नहीं होती है 2. यह आम तौर पर कैसे काम करता है ज़्यादातर मामलों में: वकील आरोपी की तरफ से पेश होता है कोर्ट दलीलें सुनता है और FIR और डॉक्यूमेंट्स की जांच करता है कोर्ट इंटरिम प्रोटेक्शन दे सकता है या नोटिस जारी कर सकता है 3. जब फिजिकली पेश होने की ज़रूरत नहीं होती है कोर्ट अक्सर बिना पेश हुए एंटीसिपेटरी बेल दे देते हैं जब: मामला शुरुआती स्टेज में हो एप्लीकेंट की पहचान को लेकर कोई शक न हो सिर्फ़ कानूनी दलीलों की ज़रूरत हो इंटरिम प्रोटेक्शन पर विचार किया जा रहा हो 4. जब कोर्ट पेश होने की ज़रूरत बता सकता है कोर्ट खुद पेश होने का निर्देश दे सकता है अगर: मामला गंभीर हो (जैसे, गंभीर अपराध) कोर्ट फैक्ट्स या पहचान वेरिफाई करना चाहता हो अलग-अलग वर्जन या आरोप हों शर्तें लगाने के लिए यह ज़रूरी हो 5. इंटरिम एंटीसिपेटरी बेल की स्थिति अक्सर: इंटरिम प्रोटेक्शन बिना पेश हुए दी गई फ़ाइनल ऑर्डर में बाद में कन्फ़र्मेशन के लिए पेश होना ज़रूरी हो सकता है 6. मॉडर्न प्रैक्टिस (ज़रूरी) कई हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मामले वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए सुने जाते हैं कई जगहों पर फिजिकल मौजूदगी ज़रूरी नहीं है 7. खास बातें हाँ, आवेदक के कोर्ट में फिजिकली पेश हुए बिना भी एंटीसिपेटरी बेल दी जा सकती है, क्योंकि इसे आमतौर पर वकील के ज़रिए हैंडल किया जाता है, हालाँकि कोर्ट अगर ज़रूरी समझे तो उस व्यक्ति को बुला सकता है।