Law4u - Made in India

क्या पुलिस डिलीट किए गए सोशल मीडिया अकाउंट्स को रिकवर कर सकती है?

Answer By law4u team

हाँ, भारतीय कानून के तहत पुलिस डिलीट किए गए सोशल मीडिया अकाउंट्स को पूरी तरह से रिकवर कर सकती है और इसके लिए उनके पास तकनीकी और कानूनी दोनों प्रकार के साधन मौजूद होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपना सोशल मीडिया अकाउंट जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, व्हाट्सएप या टेलीग्राम डिलीट करता है, तो वह डेटा तुरंत हमेशा के लिए नष्ट नहीं होता है। अधिकांश सोशल मीडिया कंपनियां सुरक्षा, कानूनी अनुपालन और अपने सर्वर की कार्यप्रणाली के तहत यूजर का डेटा अपने सर्वर पर एक निश्चित अवधि तक सुरक्षित रखती हैं। भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में इन मामलों को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में देखा जाता है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (जिसे अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, BSA के नाम से जाना जाता है) के प्रावधानों के तहत पुलिस अदालती आदेश या कानूनी नोटिस के माध्यम से इन कंपनियों से डिलीट किए गए डेटा को हासिल कर सकती है। जांच के दौरान पुलिस साइबर सेल की मदद लेती है, जो इस प्रकार के तकनीकी मामलों को सुलझाने में विशेष रूप से प्रशिक्षित होती है। कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की मूल कंपनी को औपचारिक नोटिस भेजती है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 91 (पुरानी सीआरपीसी की धारा 91) के तहत जारी किया जाता है, जिसके अंतर्गत किसी भी जांच अधिकारी को मामले की जांच के लिए किसी भी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को पेश करने का आदेश देने का अधिकार होता है। चूँकि मेटा, गूगल, एक्स जैसी अधिकांश बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के सर्वर भारत से बाहर स्थित हैं, इसलिए भारत सरकार द्वारा नियुक्त किए गए नोडल अधिकारियों और आपसी कानूनी सहायता संधियों (MLAT) के माध्यम से भी यह डेटा प्राप्त किया जाता है। टेक्निकल प्रक्रिया की बात करें तो जब कोई यूजर अपना अकाउंट डिलीट करता है, तो कंपनियों की नीति के अनुसार 30 दिनों तक का डीएक्टिवेट या ग्रेस पीरियड होता है जिसमें अकाउंट रीएक्टिवेट किया जा सकता है। इसके अलावा, कई बार यूजर केवल अकाउंट डीएक्टिवेट करते हैं और उन्हें लगता है कि वे डिलीट हो गया है। यहां तक कि अगर अकाउंट स्थायी रूप से डिलीट भी कर दिया जाता है, तो भी सोशल मीडिया कंपनियों के बैकअप सर्वर और क्लाउड स्टोरेज में लॉग फाइल्स, आईपी एड्रेस, चैट हिस्ट्री, फोटो, वीडियो और डिलीट करने से पहले की गई गतिविधियां सुरक्षित रहती हैं। पुलिस इन कंपनियों से डिलीट किए गए संदेशों के लॉग, डिलीट करने की सटीक तारीख और समय, और उस अकाउंट को एक्सेस करने वाले डिवाइस का आईएमईआई नंबर या आईपी एड्रेस मांग सकती है। यदि मामला गंभीर अपराध जैसे आतंकवाद, साइबर फ्रॉड, राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, बच्चों के यौन शोषण, या गंभीर आपराधिक साजिश से जुड़ा हुआ है, तो जांच एजेंसियां और अधिक गहराई से तकनीकी विश्लेषण करती हैं। पुलिस संदिग्ध व्यक्ति के मोबाइल फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर को जब्त करके उसकी फॉरेंसिक जांच करवाती है। सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) जैसी संस्थाएं डिलीट किए गए फोन से कैश मेमोरी, कुकीज, ब्राउज़र हिस्ट्री और ऐप्स के स्थानीय डेटा को रिकवर कर लेती हैं। कई बार सोशल मीडिया ऐप फोन की लोकल मेमोरी में चैट का बैकअप स्टोर रखते हैं, जिसे फॉरेंसिक टूल्स की मदद से निकाला जा सकता है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) और IT Act के तहत साइबर अपराधों की जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का बहुत बड़ा महत्व है। यदि कोई आरोपी यह सोचता है कि अकाउंट डिलीट करने से वह पुलिस की पकड़ से बच जाएगा, तो यह उसकी गलतफहमी है क्योंकि डिजिटल दुनिया में हर गतिविधि का एक डिजिटल पदचिह्न यानी डिजिटल फुटप्रिंट पीछे छूट जाता है। आईपी एड्रेस और सर्विस प्रोवाइडर के रिकॉर्ड के जरिए पुलिस आसानी से यह पता लगा लेती है कि अकाउंट को कौन और कहाँ से चला रहा था। इसलिए, पुलिस के लिए डिलीट किए गए सोशल मीडिया अकाउंट्स का डेटा रिकवर करना और उसे अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश करना पूरी तरह से संभव है।

साइबर अपराध Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Mariyam Khan

Advocate Mariyam Khan

Civil, Revenue, Property, Breach of Contract, Recovery

Get Advice
Advocate Jamaluddin G

Advocate Jamaluddin G

Civil, Family, Cheque Bounce, Breach of Contract, Landlord & Tenant

Get Advice
Advocate M.s.shahare

Advocate M.s.shahare

Banking & Finance, Civil, Criminal, Cyber Crime, GST, Family, High Court, Motor Accident, R.T.I, Tax

Get Advice
Advocate Anil Kumar Pandey

Advocate Anil Kumar Pandey

Anticipatory Bail, Arbitration, Bankruptcy & Insolvency, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, GST, Domestic Violence, Family, High Court, Immigration, Insurance, International Law, Labour & Service, Landlord & Tenant, Media and Entertainment, Medical Negligence, Motor Accident, Muslim Law, NCLT, Patent, Property, R.T.I, Recovery, RERA, Supreme Court, Tax, Trademark & Copyright, Wills Trusts

Get Advice
Advocate Venkatrajan Senthil

Advocate Venkatrajan Senthil

Anticipatory Bail, High Court

Get Advice
Advocate Shreyank Mankani

Advocate Shreyank Mankani

Anticipatory Bail,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Court Marriage,Criminal,Divorce,Domestic Violence,Family,High Court,Landlord & Tenant,Recovery

Get Advice
Advocate Amrit Preet Singh

Advocate Amrit Preet Singh

Family, High Court, Criminal, GST, Immigration

Get Advice
Advocate Hari Krishan Pandey

Advocate Hari Krishan Pandey

Anticipatory Bail,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Criminal,Cyber Crime,Divorce,Domestic Violence,Family,High Court,Landlord & Tenant,Motor Accident,Property,R.T.I,Insurance,

Get Advice
Advocate Mohan Soni

Advocate Mohan Soni

Cheque Bounce, Criminal, Cyber Crime, Domestic Violence, Family

Get Advice
Advocate Gaurav Kumar

Advocate Gaurav Kumar

Anticipatory Bail, Court Marriage, Cyber Crime, Criminal, Domestic Violence, Family, Divorce, Cheque Bounce, Child Custody, Documentation, High Court

Get Advice

साइबर अपराध Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.