Answer By law4u team
भारत में एसिड हमलों के पीड़ितों के लिए भारतीय कानून के तहत कई कड़े और महत्वपूर्ण कानूनी उपाय उपलब्ध हैं जिनका उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना, उनका मुफ्त इलाज सुनिश्चित करना और उन्हें मुआवजा देना है। सबसे पहले, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पहले के भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधानों के तहत एसिड हमला एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 124 के तहत एसिड फेंकने या एसिड का उपयोग करके गंभीर चोट पहुँचाने के लिए कठोर दंड का प्रावधान है जिसमें कम से कम 10 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, साथ ही भारी जुर्माने का भी प्रावधान है जो पूरी तरह से पीड़ित के इलाज के खर्चे के लिए दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि एसिड हमले के कारण पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, तो इसे हत्या की श्रेणी में गिना जाता है और इसके लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों और दिशा-निर्देशों के आधार पर एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों को और अधिक मजबूत किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के अनुसार, देश के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल को एसिड अटैक पीड़ित का इलाज करने से इनकार करने का कोई अधिकार नहीं है। हर अस्पताल और डॉक्टर की यह कानूनी बाध्यता है कि वे पीड़ित को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा और आवश्यक उपचार प्रदान करें और इस इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार या संबंधित अस्पताल द्वारा वहन किया जाएगा। इलाज के लिए किसी भी पीड़ित या उसके परिवार से पैसे की मांग नहीं की जा सकती और यदि कोई अस्पताल ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, एसिड अटैक के मामलों में पुलिस की भूमिका भी बेहद संवेदनशील और त्वरित होनी चाहिए, और प्राथमिकी यानी एफआईआर दर्ज करने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं की जानी चाहिए। आर्थिक सहायता और पुनर्वास के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 353 (जो अब नए कानूनों में भी समाहित है) और विभिन्न राज्यों की पीड़ित मुआवजा योजनाओं (Victim Compensation Schemes) के तहत एसिड पीड़ितों को वित्तीय सहायता दी जाती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) के माध्यम से पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे अदालतों में अपने अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ सकें। इसके अलावा, पीड़ित महिला को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने और उसकी आजीविका चलाने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाते हैं। एसिड की खुले बाजार में बिक्री पर भी कानून द्वारा कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, कोई भी दुकानदार बिना वैध लाइसेंस और खरीदार की पूरी पहचान दर्ज किए बिना एसिड नहीं बेच सकता है। खरीदार की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और उसे एक वैध कारण बताना होता है। एसिड बेचने वाले विक्रेताओं को अपने स्टॉक का पूरा रजिस्टर रखना अनिवार्य है और यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाती है। इन सभी कानूनी उपायों का मुख्य उद्देश्य न केवल अपराधियों को कड़ी सजा दिलाना है, बल्कि पीड़ितों को शारीरिक और मानसिक आघात से उबरने के लिए पूर्ण समर्थन, चिकित्सा और सुरक्षा प्रदान करना भी है।