Law4u - Made in India

अगर किसी को जान से मारने की धमकी मिले तो उसे क्या करना चाहिए?

14-Sep-2026
आपराधिक

Answer By law4u team

यदि किसी व्यक्ति को जान से मारने की धमकी मिलती है, तो यह भारतीय कानून के तहत एक गंभीर अपराध है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) देना एक दंडनीय अपराध है। ऐसे में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानूनी कार्रवाई के लिए तुरंत कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। यहाँ विस्तृत कानूनी प्रक्रिया दी गई है कि आपको ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। 1. सबसे पहले अपने और अपने परिवार की भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करें। यदि आपको किसी विशिष्ट व्यक्ति से तुरंत खतरे की आशंका है, तो सुरक्षित स्थान पर जाएं और अकेले रहने से बचें। यदि स्थिति आपातकालीन है, तो तुरंत पुलिस सहायता के लिए आपातकालीन नंबर डायल करें। 2. धमकी देने वाले व्यक्ति या माध्यम के सभी सबूतों को सुरक्षित रखें। यदि धमकी फोन कॉल पर मिली है, तो कॉल रिकॉर्डिंग, कॉलर आईडी, और ऑडियो को संभाल कर रखें। यदि धमकी टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप, ईमेल, या सोशल मीडिया के जरिए मिली है, तो उनके स्क्रीनशॉट ले लें और चैट डिलीट न करें। यदि कोई पत्र मिला है, तो उसे सुरक्षित रखें। ये सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्य पुलिस जांच और अदालत में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। 3. अपने नजदीकी पुलिस थाने में तुरंत जाएं और लिखित शिकायत (First Information Report यानी FIR) दर्ज कराएं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत पुलिस के लिए संज्ञेय अपराध में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। अपनी लिखित शिकायत में धमकी मिलने की तिथि, समय, स्थान, माध्यम और धमकी देने वाले का नाम (यदि ज्ञात हो) स्पष्ट रूप से लिखें। शिकायत में उन सभी गवाहों के नाम भी शामिल करें जो इस घटना के बारे में जानते हैं। 4. यदि संबंधित पुलिस थाना आपकी शिकायत दर्ज करने से मना करता है या टालमटोल करता है, तो आप भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के प्रावधानों के तहत अपनी शिकायत को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से सीधे संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) को भेज सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने राज्य के उच्च न्यायालय में आपराधिक रिट याचिका दायर कर सकते हैं या मजिस्ट्रेट के समक्ष भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जारी करवा सकते हैं। 5. यदि आपको पुलिस अधिकारियों द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती है या लगातार जान का खतरा बना हुआ है, तो आप पुलिस अधीक्षक या जिलाधिकारी को लिखित रूप में व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड (Police Protection) प्रदान करने का औपचारिक अनुरोध कर सकते हैं। इसके साथ ही आप राज्य के गृह विभाग को भी प्रतिलिपि भेज सकते हैं। 6. भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक धमकी के मामलों में पुलिस आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है। साधारण आपराधिक धमकी के लिए कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। यदि धमकी ऐसी है जिससे किसी की हत्या करने या गंभीर चोट पहुंचाने का डर हो, या आग से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की बात हो, तो सजा और भी अधिक गंभीर हो सकती है। पुलिस जांच के दौरान आपको अपना बयान मजिस्ट्रेट के सामने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज कराने का अधिकार होता है, जो अदालत में एक मजबूत साक्ष्य माना जाता है। 7. यदि धमकी देने वाला व्यक्ति कोई प्रभावशाली है या आपको लगता है कि पुलिस जांच में कोई ढिलाई हो रही है, तो आप किसी आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ वकील की सहायता ले सकते हैं। वकील की मदद से आप अदालत में अग्रिम जमानत के विरोध, पुलिस सुरक्षा के लिए याचिका, या मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगने के लिए कानूनी कदम उठा सकते हैं। हमेशा याद रखें कि डरने के बजाय कानून की शरण में जाना आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

आपराधिक Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Manjunath Kuri

Advocate Manjunath Kuri

Civil, Cheque Bounce, Anticipatory Bail, Criminal, Divorce

Get Advice
Advocate Nisha Rani

Advocate Nisha Rani

Civil, Corporate, Court Marriage, Criminal, Divorce, Family, High Court, Consumer Court, Cheque Bounce

Get Advice
Advocate Amit Rai

Advocate Amit Rai

Child Custody, Banking & Finance, Anticipatory Bail, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family, Court Marriage, Landlord & Tenant, Medical Negligence, Motor Accident

Get Advice
Advocate Divyanshu Singh Suryavanshi

Advocate Divyanshu Singh Suryavanshi

Anticipatory Bail, High Court, Arbitration, Bankruptcy & Insolvency, Breach of Contract, Armed Forces Tribunal, Child Custody, Banking & Finance, Cheque Bounce, Corporate, Civil, Court Marriage, Customs & Central Excise, Consumer Court, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Criminal, Domestic Violence, Family, GST

Get Advice
Advocate Parveen Gupta

Advocate Parveen Gupta

Anticipatory Bail, Banking & Finance, Cheque Bounce, Criminal, Domestic Violence, Family, Motor Accident, Succession Certificate, Revenue

Get Advice
Advocate Rohit Gaur

Advocate Rohit Gaur

GST,Labour & Service,Landlord & Tenant,Tax,Startup,Supreme Court,Succession Certificate,R.T.I,International Law,High Court,Trademark & Copyright,Motor Accident,Criminal,Cyber Crime,Court Marriage,Civil,Corporate,Property,

Get Advice
Advocate Karan Gida

Advocate Karan Gida

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Court Marriage, Criminal, Family, High Court

Get Advice
Advocate Shivam Kumar Mishra

Advocate Shivam Kumar Mishra

Anticipatory Bail, Arbitration, Cheque Bounce, Motor Accident, Property

Get Advice
Advocate Lekh Narayan Karna

Advocate Lekh Narayan Karna

Breach of Contract, Cheque Bounce, Corporate, Criminal, Documentation, High Court, Labour & Service, Landlord & Tenant, NCLT, Recovery, Trademark & Copyright

Get Advice
Advocate Govind Dangi

Advocate Govind Dangi

Cheque Bounce, Court Marriage, Criminal, Domestic Violence, Family

Get Advice

आपराधिक Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.