Answer By law4u team
भारत में साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्ति अपनी दर्ज की गई शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन माध्यम से बहुत ही आसानी से ट्रैक कर सकता है। जब भी कोई नागरिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे एक यूनिक एकनॉलेजमेंट नंबर या शिकायत संख्या प्राप्त होती है, जिसकी मदद से स्टेटस की जांच की जाती है। सबसे पहले आपको नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट के होमपेज पर आपको ट्रैक योर स्टेटस नाम का एक विकल्प दिखाई देगा, जिस पर आपको क्लिक करना होगा। इस विकल्प पर क्लिक करने के बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा जहाँ आपको अपनी शिकायत से संबंधित जानकारी दर्ज करनी होगी। शिकायत का स्टेटस ट्रैक करने के लिए आपको पोर्टल पर लॉगिन करना पड़ सकता है या फिर सीधे अपनी शिकायत संख्या दर्ज करनी पड़ सकती है। यदि आपने पोर्टल पर पहले से अकाउंट बनाया हुआ है, तो आप अपने क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लॉगिन कर सकते हैं और डैशबोर्ड में जाकर अपनी सभी शिकायतों की वर्तमान स्थिति देख सकते हैं। यदि आपने बिना अकाउंट के यानी एनोनिमस रूप से शिकायत दर्ज कराई थी, तब भी आपको मिला हुआ एक्नॉलेजमेंट नंबर और मोबाइल नंबर पर आया वन टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी दर्ज करके स्टेटस देखने की सुविधा मिलती है। एक बार जब आप अपना एकनॉलेजमेंट नंबर और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज कर देते हैं, तो स्क्रीन पर आपकी शिकायत का वर्तमान चरण दिखाई देता है। स्टेटस में यह जानकारी मिलती है कि क्या आपकी शिकायत अभी शुरुआती जांच के चरण में है, क्या उसे संबंधित राज्य या जिले की स्थानीय पुलिस साइबर सेल को अग्रसारित कर दिया गया है, या फिर उस पर कोई एफआईआर यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। यदि स्थानीय पुलिस थाने या साइबर सेल को मामला ट्रांसफर कर दिया गया है, तो स्टेटस में उस पुलिस स्टेशन का नाम, संपर्क विवरण और जांच अधिकारी का विवरण भी मिल सकता है, जिससे आप सीधे संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, यदि मामला वित्तीय धोखाधड़ी यानी फाइनेंशियल फ्रॉड से जुड़ा है, तो नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर स्टेटस ट्रैक करने के साथ-साथ आप उस बैंक की स्थिति भी देख सकते हैं जहाँ धोखाधड़ी की गई राशि होल्ड की गई है। वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act, 2000) के प्रावधानों के तहत त्वरित कार्रवाई की जाती है। यदि आपके साथ ऑनलाइन ठगी हुई है और तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराई गई थी, तो पोर्टल का स्टेटस आपको यह भी बताता है कि साइबर सेल द्वारा संबंधित बैंकों को ट्रांजैक्शन रोकने या राशि फ्रीज करने के लिए नोटिस भेजा गया है या नहीं। यदि ऑनलाइन पोर्टल पर स्टेटस लंबे समय तक अपडेट नहीं होता है या कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिलती है, तो नागरिक के पास अन्य कानूनी विकल्प भी उपलब्ध होते हैं। आप अपने क्षेत्र के स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर या जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police) को लिखित आवेदन देकर अपनी शिकायत की प्रगति के बारे में पूछताछ कर सकते हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के प्रावधानों के तहत पुलिस अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे नागरिकों को उनकी शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी दें। इसके अलावा, यदि पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करती है, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175 के तहत पुलिस अधिकारी को लिखित शिकायत भेज सकते हैं या मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने और उसे ट्रैक करने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी बनाई गई है ताकि आम नागरिकों को न्याय मिल सके। आपको सलाह दी जाती है कि अपनी शिकायत से जुड़े सभी स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट, और पोर्टल से मिला रसीद नंबर सुरक्षित रखें। जब भी आप जांच अधिकारी से मिलें या ऑनलाइन स्टेटस चेक करें, तो ये दस्तावेज आपके पास होने चाहिए। इस प्रकार डिजिटल इंडिया के इस दौर में प्रौद्योगिकी का उपयोग करके कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपनी साइबर शिकायत की पल-पल की जानकारी प्राप्त कर सकता है और न्याय की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को ट्रैक कर सकता है।