Answer By law4u team
भारत में ऑनलाइन कॉपीराइट उल्लंघन एक गंभीर कानूनी अपराध है और इसके लिए कॉपीराइट अधिनियम, 1957 (Copyright Act, 1957) के तहत कठोर दंड का प्रावधान है। जब कोई व्यक्ति बिना किसी कानूनी अधिकार या कॉपीराइट धारक की पूर्व अनुमति के इंटरनेट पर किसी साहित्यिक, कलात्मक, संगीत, फिल्म, सॉफ्टवेयर या अन्य डिजिटल सामग्री को अपलोड करता है, डाउनलोड करवाता है, साझा करता है या व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग करता है, तो इसे ऑनलाइन कॉपीराइट उल्लंघन माना जाता है। इस प्रकार के उल्लंघनों से निपटने के लिए भारतीय कानून में दीवानी और फौजदारी दोनों तरह की कानूनी कार्रवाइयों का प्रावधान किया गया है। कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 63 के तहत जब कोई व्यक्ति जानबूझकर कॉपीराइट का उल्लंघन करता है या उल्लंघन में सहायता करता है, तो उसे आपराधिक सजा दी जा सकती है। इस धारा के अनुसार दोषी पाए जाने पर कम से कम छह महीने की जेल की सजा हो सकती है, जिसे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, इस अपराध के लिए न्यूनतम 50,000 रुपये का जुर्माना देना अनिवार्य है, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक किया जा सकता है। बार-बार ऐसा अपराध करने पर सजा और जुर्माने की राशि और अधिक सख्त हो सकती है, क्योंकि कानून ऐसे मामलों में पुनरावृत्ति को गंभीरता से लेता है। धारा 63ए के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी कंप्यूटर या डिजिटल माध्यम का उपयोग करके कॉपीराइट सामग्री की पायरेसी करता है या उसे बढ़ावा देता है, तो उसे विशेष दंड मिल सकता है। इसके अलावा, कॉपीराइट अधिनियम, 1957 की धारा 55 के तहत दीवानी उपाय भी उपलब्ध हैं। इसके तहत कॉपीराइट मालिक अदालत में मुकदमा दायर कर सकता है और हर्जाने की मांग कर सकता है। अदालत उल्लंघन करने वाले व्यक्ति से यह मांग कर सकती है कि वह मुनाफे का हिसाब दे या फिर मालिक को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई करे। अदालत उल्लंघन करने वाली सामग्री को तुरंत हटाने या ब्लॉक करने का आदेश भी दे सकती है और ऐसी सामग्री या उसे बनाने में उपयोग होने वाले उपकरणों को जब्त करने का आदेश भी पारित कर सकती है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) भी ऑनलाइन पायरेसी और डिजिटल उल्लंघनों के मामलों में लागू होता है। इस अधिनियम की धारा 66 और अन्य प्रावधानों के तहत यदि कोई कंप्यूटर संसाधन या इंटरनेट नेटवर्क का उपयोग करके अनधिकृत रूप से डेटा चुराता है या डिजिटल सामग्री में फेरबदल करता है, तो उसे तीन साल तक की कैद और भारी जुर्माने की सजा मिल सकती है। यदि कोई इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) या वेबसाइट मालिक कॉपीराइट उल्लंघन की आधिकारिक शिकायत मिलने के बाद भी अपने सर्वर से उल्लंघनकारी सामग्री को नहीं हटाता है, तो उसे भी कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ऑनलाइन कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों में पुलिस और साइबर सेल सीधे तौर पर कार्रवाई कर सकती हैं। कॉपीराइट उल्लंघन अब एक संज्ञेय अपराध (cognizable offence) माना जाता है, जिसका अर्थ है कि पुलिस बिना किसी वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और पायरेटेड सामग्री या सर्वर को अपने कब्जे में ले सकती है। डिजिटल युग में टॉरेंट वेबसाइट्स चलाना, पायरेटेड फिल्में या गाने डाउनलोड करने के लिए लिंक साझा करना, या किसी अन्य व्यक्ति के डिजिटल कंटेंट को अपनी वेबसाइट पर बिना अनुमति के पुनर्जीवित करना इस कानून के दायरे में सीधे अपराध माने जाते हैं। ऐसे मामलों से बचने का एकमात्र तरीका यह है कि हमेशा वैध लाइसेंस प्राप्त सामग्री का उपयोग किया जाए या फिर सामग्री के मालिक से लिखित अनुमति ली जाए ताकि किसी भी प्रकार के कानूनी मुकदमे, भारी जुर्माने और जेल की सजा से बचा जा सके।