Law4u - Made in India

पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने पर क्या सज़ा है?

19-Sep-2026
आपराधिक

Answer By law4u team

पब्लिक प्रॉपर्टी यानी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना भारत में एक बहुत ही गंभीर अपराध है। इसके लिए कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं ताकि सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को अराजक तत्वों या प्रदर्शनकारियों से बचाया जा सके। जब भी देश में कोई आंदोलन, प्रदर्शन या दंगा होता है, तो अक्सर बस, ट्रेन, सरकारी इमारतें या सड़क की संपत्ति को निशाना बनाया जाता है। इसके खिलाफ मुख्य रूप से सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 (Prevention of Damage to Public Property Act, 1984) के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के कई प्रावधान भी ऐसे मामलों में लागू होते हैं। इस कानून के तहत पब्लिक प्रॉपर्टी का मतलब ऐसी किसी भी संपत्ति से है जो केंद्र सरकार, राज्य सरकार, किसी स्थानीय प्राधिकरण, किसी निगम, कंपनी या संस्था की हो। इसमें रेलवे, बसें, बिजली बोर्ड, पानी की पाइपलाइनें, सरकारी अस्पताल, स्कूल, और सार्वजनिक सड़कें सभी शामिल हैं। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसी किसी भी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या नष्ट करता है, तो उसे Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 के तहत पांच साल तक की कैद और जुर्माने की सज़ा हो सकती है। यदि नुकसान आग लगाने या किसी विस्फोटक पदार्थ के इस्तेमाल से किया गया हो, तो इस अधिनियम की धारा 4 के तहत सजा और भी कड़ी हो जाती है, जिसमें कम से कम एक साल और अधिकतम दस साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है। न्यायालयों और विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों को बहुत गंभीरता से लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक मामलों में यह निर्देश दिए हैं कि जब भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उसके लिए जिम्मेदार प्रदर्शनकारियों या संगठनों से उसकी भरपाई करवाई जानी चाहिए। इसके लिए अदालतों को स्वतः संज्ञान लेने या कमिश्नर नियुक्त करके नुकसान का आकलन करने का अधिकार दिया गया है। जो लोग या संगठन इस तरह की तोड़फोड़ में शामिल पाए जाते हैं, उन्हें अपनी जेब से सरकारी नुकसान की भरपाई करनी पड़ती है और उनकी संपत्तियों को भी कुर्क किया जा सकता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के अंतर्गत भी आपराधिक तोड़फोड़ और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए अलग से दंड तय किए गए हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति दंगा करते हुए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो उस पर BNS के दंगा फैलाने से संबंधित प्रावधानों या IPC की धारा 147 और 427 के तहत अतिरिक्त मुकदमे दर्ज किए जाते हैं। आपराधिक साजिश रचने, सरकारी काम में बाधा डालने और लोक सेवकों पर हमला करने के आरोप भी इसमें जोड़े जाते हैं, जिससे अभियुक्त की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसे मामलों में पुलिस बिना वारंट के भी गिरफ्तारी कर सकती है और इन धाराओं के तहत जमानत मिलना भी काफी कठिन होता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब पुलिस इस प्रकार का कोई मामला दर्ज करती है, तो वीडियो फुटेज, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जाती है। यदि कोई व्यक्ति भीड़ का हिस्सा है और उस भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, तो कानून की नजर में उस भीड़ का हर एक सदस्य उस नुकसान के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है, भले ही उसने खुद हथौड़ा न चलाया हो। इसलिए यह जरूरी है कि किसी भी प्रकार के प्रदर्शन या आंदोलन के दौरान कानून की सीमा के भीतर रहा जाए और सरकारी संपत्ति को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाई जाए। ऐसा करने पर न केवल जेल की हवा खानी पड़ सकती है बल्कि भारी आर्थिक दंड और आपराधिक रिकॉर्ड के कारण भविष्य में सरकारी नौकरी या पासपोर्ट मिलने में भी बाधा आ सकती है।

आपराधिक Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Nikhil Bhavsar

Advocate Nikhil Bhavsar

Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family, Succession Certificate

Get Advice
Advocate Gaurang Dwivedi

Advocate Gaurang Dwivedi

Anticipatory Bail, Banking & Finance, Cheque Bounce, Breach of Contract, Child Custody, Criminal, High Court, Labour & Service

Get Advice
Advocate Vaibhav Kumar Vishwakarma

Advocate Vaibhav Kumar Vishwakarma

Anticipatory Bail, Arbitration, Bankruptcy & Insolvency, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Family, High Court, Motor Accident, R.T.I

Get Advice
Advocate Mahesh Sharma

Advocate Mahesh Sharma

Cheque Bounce, Civil, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family, Insurance, Motor Accident, Property, R.T.I, Revenue

Get Advice
Advocate S R Karoshi

Advocate S R Karoshi

Arbitration, Breach of Contract, Documentation, High Court, Patent, Supreme Court, Trademark & Copyright

Get Advice
Advocate Sunil Kumar Sharma

Advocate Sunil Kumar Sharma

Bankruptcy & Insolvency, Banking & Finance, Consumer Court, Family, Motor Accident

Get Advice
Advocate Tejas Kapoor

Advocate Tejas Kapoor

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Child Custody, Divorce, Consumer Court

Get Advice
Advocate Ishaq Mohd

Advocate Ishaq Mohd

Criminal, Domestic Violence, Cheque Bounce, Civil, Cyber Crime

Get Advice
Advocate Raghvendra Singh Rajput

Advocate Raghvendra Singh Rajput

Anticipatory Bail, Arbitration, Cheque Bounce, Divorce, Domestic Violence, Family, Motor Accident, Cyber Crime, Succession Certificate, Criminal, Court Marriage, Documentation, High Court

Get Advice
Advocate Akshay Thakur

Advocate Akshay Thakur

Anticipatory Bail, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, Labour & Service, Motor Accident, Wills Trusts, Revenue

Get Advice

आपराधिक Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.