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क्या नाबालिगों के लिए एंटीसिपेटरी बेल उपलब्ध है?

Answer By law4u team

भारतीय कानून के तहत नाबालिगों यानी किशोरों के लिए अग्रिम जमानत यानी एंटीसिपेटरी बेल के प्रावधानों को समझने के लिए हमें किशोर न्याय अधिनियम, 2015 यानी Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 (JJ Act) और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 यानी Code of Criminal Procedure, 1973 (CrPC) या उसकी जगह आए नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 यानी Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) के नियमों को देखना होगा। सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कानून के अनुसार किसी वयस्क व्यक्ति के लिए धारा 438 CrPC या नई BNSS के तहत जो नियमित अग्रिम जमानत का प्रावधान है, वह सीधे तौर पर नाबालिगों पर लागू नहीं होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि किशोर न्याय प्रणाली का उद्देश्य बच्चों को सजा देना नहीं बल्कि उनका सुधार करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 (JJ Act) की धारा 12 के अंतर्गत जब भी किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ा जाता है या हिरासत में लिया जाता है जिस पर किसी अपराध का आरोप है और जिसकी आयु 18 वर्ष से कम है, तो उसे एक किशोर यानी Child in Conflict with Law माना जाता है। ऐसे किशोर के मामले में सामान्य पुलिस थाने या जेल में रखने के बजाय उसे विशेष किशोर पुलिस इकाई या बाल गृह में रखने का प्रावधान है। JJ Act की धारा 12 यह स्पष्ट करती है कि जब किसी ऐसे किशोर को गिरफ्तार किया जाता है या हिरासत में लिया जाता है, जिस पर कोई जमानती या गैर-जमानती अपराध करने का आरोप है, तो उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि किशोर मामलों में जमानत एक नियम है और जेल भेजना या नजरबंद रखना एक अपवाद है। चूंकि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 के तहत किशोरों को जमानत पाने का एक मजबूत और विशेष वैधानिक अधिकार मिला हुआ है, इसलिए अदालतों और कानूनी विशेषज्ञों का यह मानना रहा है कि वयस्कों की तरह CrPC या BNSS की धारा 438 के तहत पारंपरिक अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका नाबालिगों के लिए दायर करने की आवश्यकता सामान्यतः नहीं होती है। यदि किसी नाबालिग को पुलिस द्वारा पकड़े जाने या पूछताछ के लिए बुलाए जाने का अंदेशा है, तो उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक सीधे किशोर न्याय बोर्ड यानी Juvenile Justice Board (JJB) के समक्ष उपस्थित होकर नियमित जमानत या संरक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं। JJ Act की धारा 12 के अनुसार, किशोर को जमानत देने से केवल तीन विशेष परिस्थितियों में ही इंकार किया जा सकता है। पहली परिस्थिति यह है कि यदि किशोर को जमानत पर छोड़ने से उसके किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में आने की संभावना हो। दूसरी परिस्थिति यह है कि इससे उसे नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक रूप से गंभीर खतरा हो सकता है। तीसरी और अंतिम परिस्थिति यह है कि जमानत देने से न्याय के उद्देश्य के बाधित होने या समाज के हितों को भारी नुकसान पहुँचने की संभावना हो। यदि इन तीनों में से कोई भी नकारात्मक कारण नहीं बनता है, तो किशोर न्याय बोर्ड को उस नाबालिग को जमानत देनी ही होगी, भले ही उस पर गंभीर से गंभीर अपराध का आरोप क्यों न हो। ऐसी स्थिति में जहाँ पुलिस किसी नाबालिग को पूछताछ के लिए परेशान कर रही हो या उस पर किसी गंभीर आपराधिक मामले में एफआईआर दर्ज हो गई हो, तो पारंपरिक रूप सेशंस कोर्ट या हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने के बजाय, संबंधित किशोर न्याय बोर्ड (JJB) में तुरंत अग्रिम संरक्षण या जमानत के लिए प्रार्थना पत्र देना चाहिए। इसके अलावा, यदि पुलिस किसी नाबालिग को हिरासत में लेती है, तो यह कानूनी रूप से अनिवार्य है कि उसे 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाए और बोर्ड तुरंत इस बात पर विचार करेगा कि उसे जमानत पर छोड़ा जाना चाहिए या नहीं। अनेक उच्च न्यायालयों ने अपने विभिन्न फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि चूँकि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 एक विशेष कानून है जो बच्चों से संबंधित मामलों में पूरी तरह से प्रभावी है, इसलिए CrPC की धारा 438 या BNSS के तहत अग्रिम जमानत का प्रावधान किशोरों पर लागू नहीं होता, क्योंकि उनके लिए JJ Act की धारा 12 में पहले से ही बहुत अधिक उदार और सुरक्षात्मक जमानत का प्रावधान मौजूद है। यदि किसी सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में नाबालिग की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका दायर की जाती है, तो अदालतें अक्सर इसे यह कहकर खारिज कर देती हैं कि इस मामले में उचित मंच किशोर न्याय बोर्ड है जहाँ नाबालिग को अधिनियम के तहत आसानी से संरक्षण और जमानत मिल सकती है। इसलिए, निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि हालांकि वयस्कों वाली पारंपरिक एंटीसिपेटरी बेल नाबालिगों के लिए तकनीकी रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 12 के तहत नाबालिगों को उससे भी अधिक व्यापक और आसान कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। इस विशेष कानून के तहत यदि कोई नाबालिग पुलिस की गिरफ्त में आने वाला है या उस पर कोई आपराधिक मामला दर्ज है, तो उसके अभिभावक सीधे किशोर न्याय बोर्ड (JJB) से संपर्क करके सुरक्षा और जमानत प्राप्त कर सकते हैं, जहाँ कानून का मुख्य उद्देश्य बच्चे की भलाई और उसका सुधार सुनिश्चित करना होता है।

Answer By Aashish Gupta

JJB के पास गिरफ्तार की आशंका से जाता है कोई तो वो पहले ही जमानत दे सकता है??

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