Answer By law4u team
यदि कोई व्यक्ति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके आपकी या किसी अन्य व्यक्ति की फर्जी या नकली न्यूड (अश्लील) तस्वीर बनाता है और उसे इंटरनेट पर प्रसारित करता है, तो यह एक गंभीर अपराध है। इस तरह के मामलों से निपटने के लिए भारतीय कानून में कड़े प्रावधान किए गए हैं। आपको बिना समय गंवाए निम्नलिखित कानूनी कदम उठाने चाहिए। 1. सबसे पहले आपको अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत एक औपचारिक शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही, आप अपने जिले के महिला पुलिस स्टेशन या साइबर सेल (Cyber Crime Cell) से भी संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष यूनिट्स होती हैं। 2. आप भारत सरकार के आधिकारिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। इस पोर्टल पर तुरंत शिकायत करने से पुलिस और साइबर एजेंसियों को उस डिजिटल सामग्री को ट्रैक करने और हटाने में मदद मिलती है। 3. यदि वह फर्जी तस्वीर किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेबसाइट या ऐप पर अपलोड की गई है, तो आपको तुरंत उस प्लेटफॉर्म के शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) को रिपोर्ट करना चाहिए और उस लिंक या पोस्ट को हटाने का अनुरोध करना चाहिए। इन प्लेटफॉर्म्स की कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वे ऐसी अश्लील सामग्री को हटाने के लिए तेजी से कार्रवाई करें। 4. इस अपराध के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 77 के तहत कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जो किसी भी महिला की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें लेने या उन्हें प्रसारित करने से संबंधित है। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 यानी Information Technology Act, 2000 (IT Act) की धारा 66E और धारा 67, 67A तथा 67B के तहत भी गंभीर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें बिना सहमति के निजी अंगों की तस्वीरें कैप्चर करना, प्रकाशित करना और इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रसारित करना शामिल है। 5. कानूनी कार्रवाई को मजबूत बनाने के लिए आपको डिजिटल सबूत सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। उस फर्जी तस्वीर के स्क्रीनशॉट लें, उस वेबपेज का यूआरएल (URL) सेव करें, और यदि संभव हो तो उस व्यक्ति का प्रोफाइल या विवरण भी सुरक्षित रखें जिसने इसे बनाया या फैलाया है। इन सबूतों को पेन ड्राइव या प्रिंट के रूप में पुलिस को सौंपें। 6. यदि आपको लगता है कि इस मामले में किसी मध्यस्थ या सोशल मीडिया कंपनी की लापरवाही है, तो आप आईटी अधिनियम के नियमों के तहत उनसे भी शिकायत कर सकते हैं। अपनी सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए किसी अच्छे वकील से सलाह लें जो आपको आपराधिक मुकदमे में सही मार्गदर्शन दे सके।