Answer By law4u team
ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड (online shopping fraud) का शिकार होने पर आपको तुरंत और सही कदम उठाने की आवश्यकता होती है ताकि वित्तीय नुकसान को कम किया जा सके और अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। भारत में साइबर अपराधों से निपटने के लिए बहुत मजबूत कानूनी और तकनीकी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। यदि आपके साथ ऑनलाइन शॉपिंग में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी हुई है जैसे कि नकली उत्पाद मिलना, भुगतान करने के बाद सामान का डिलीवर न होना, या आपके बैंक खाते से unauthorized transaction होना, तो आप निम्नलिखित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि आप जितनी जल्दी हो सके अपनी शिकायत आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर दर्ज करें। यह पोर्टल भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इस पोर्टल पर जाने के बाद आपको रिपोर्ट अदर साइबर क्राइम (Report other cyber crime) के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद आपको अपनी यूजर आईडी बनानी होगी और अपना मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी (OTP) के जरिए लॉगिन करना होगा। लॉगिन करने के बाद आपको साइबर फ्रॉड से संबंधित सभी विवरण जैसे कि घटना की तिथि, समय, धोखाधड़ी का प्रकार, और वित्तीय नुकसान की जानकारी भरनी होगी। यदि आपके साथ वित्तीय धोखाधड़ी (financial fraud) हुई है, तो पोर्टल पर आपको तुरंत ट्रांजैक्शन विवरण और अपने बैंक खाते की जानकारी देनी चाहिए, क्योंकि जितनी जल्दी आप पोर्टल पर शिकायत दर्ज करेंगे, आपके पैसे को होल्ड (freeze) कराने की संभावना उतनी ही अधिक बढ़ जाएगी। दूसरा महत्वपूर्ण कदम यह है कि आप अपनी शिकायत तुरंत अपने बैंक को दें। यदि आपने किसी क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, यूपीआई (UPI), या नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान किया है, तो अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क करें या तुरंत नेट बैंकिंग पोर्टल के जरिए उस ट्रांजैक्शन को disputed transaction के रूप में रिपोर्ट करें। इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (Information Technology Act, 2000) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई ग्राहक समय पर (आमतौर पर तीन दिनों के भीतर) किसी unauthorized electronic transaction की सूचना अपने बैंक को देता है, तो उसकी वित्तीय जिम्मेदारी सीमित होती है या शून्य होती है। इसके अलावा, आप भारतीय रिजर्व बैंक के एकीकृत लोकपाल योजना (RBI Ombudsman Scheme) के तहत भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं यदि बैंक समय पर उचित कार्रवाई नहीं करता है। तीसरा कदम यह है कि आप अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन में स्थित साइबर सेल (Cyber Crime Police Station) में लिखित शिकायत दें। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी (cheating) और आपराधिक विश्वासघात के मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा, यदि पुलिस स्टेशन में आपकी शिकायत दर्ज करने से मना किया जाता है, तो आप कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 154 या इसके समकक्ष नए कानून के प्रावधानों के तहत पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत भेज सकते हैं। आप चाहें तो न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष CrPC की धारा 156(3) के तहत आवेदन भी दे सकते हैं ताकि अदालत पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे सके। शिकायत दर्ज करते समय आपको कुछ बहुत महत्वपूर्ण सबूत और दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखने चाहिए। इनमें ऑनलाइन मर्चेंट या ई-कॉमर्स वेबसाइट के साथ हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट, ऑर्डर कंफर्मेशन ईमेल, पेमेंट रसीद, बैंक स्टेटमेंट, उत्पाद का विवरण यदि कोई मिला हो, और वेबसाइट का लिंक या विज्ञापन शामिल हैं। यदि धोखाधड़ी किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या फर्जी ऐप के जरिए हुई है, तो उस प्रोफाइल या ऐप का स्क्रीनशॉट भी साक्ष्य के रूप में बहुत काम आता है। इन सभी दस्तावेजों को संभाल कर रखना चाहिए क्योंकि जांच अधिकारी (Investigating Officer) को जांच आगे बढ़ाने के लिए इन पुख्ता सबूतों की आवश्यकता होती है। अंत में, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act, 2019) के तहत आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline - NCH) पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आप एनजीआरसी (National Consumer Helpline) के पोर्टल पर जाकर या उनके टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके ई-कॉमर्स कंपनी या विक्रेता के खिलाफ अनुचित व्यापार प्रथाओं (unfair trade practices) और सेवा में कमी (deficiency in service) के लिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं। उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) में आप विक्रेता और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म दोनों से रिफंड और मुआवजे के लिए कानूनी दावा भी पेश कर सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड से बचने के लिए भविष्य में हमेशा प्रतिष्ठित और विश्वसनीय वेबसाइटों से ही खरीदारी करें और अनजान लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।