Answer By law4u team
भारतीय कानून के अनुसार लिव-इन पार्टनर एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक शिकायत (Criminal Complaint) बिल्कुल दर्ज करा सकते हैं। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले व्यक्तियों को कानूनन पति-पत्नी का दर्जा स्वतः ही नहीं मिल जाता, लेकिन उनके बीच हुए किसी भी प्रकार के अपराध या विवाद के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और अन्य विशेष कानूनों के तहत कानूनी रास्ते पूरी तरह से खुले हुए हैं। यदि किसी लिव-इन पार्टनर के साथ मारपीट, धोखाधड़ी, मानसिक प्रताड़ना या किसी अन्य प्रकार का अपराध होता है, तो वह पुलिस थाने में जाकर एफआईआर (FIR) दर्ज करा सकता है या सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष क्रिमिनल कंप्लेंट फाइल कर सकता है। लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के दौरान यदि कोई पार्टनर दूसरे के साथ मारपीट या शारीरिक हिंसा करता है, तो पीड़ित पक्ष भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज करा सकता है। उदाहरण के लिए, चोट पहुँचाने या क्रूरता के मामलों में BNS की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा, यदि कोई पार्टनर शादी का झूठा वादा करके या लिव-इन में रहने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में मुकर जाता है, तो इसे कानूनन बलात्कार या धोखाधड़ी की श्रेणी में माना जा सकता है और इसके लिए भी BNS के तहत गंभीर धाराओं में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अतिरिक्त, घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) के तहत भी लिव-इन पार्टनर को सुरक्षा प्रदान की गई है। माननीय उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई महिला और पुरुष काफी लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह एक ही घर में साथ रहे हैं, तो उनका रिश्ता एक प्रकार के घरेलू रिश्ते (Domestic Relationship) की परिभाषा में आता है। इसलिए, यदि ऐसे रिश्ते में रहने वाली महिला के साथ किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा (शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या मौखिक प्रताड़ना) होती है, तो वह महिला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत अपने लिव-इन पार्टनर के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकती है और संरक्षण के साथ-साथ भरण-पोषण (Maintenance) की मांग भी कर सकती है। इसके अलावा, यदि लिव-इन रिलेशनशिप के दौरान कोई वित्तीय धोखाधड़ी होती है, जैसे कि बिना सहमति के पैसे निकालना, संपत्ति हड़पना या बैंक खातों का दुरुपयोग करना, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संपत्ति और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत भी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यदि पुलिस थाना शिकायत दर्ज करने से मना कर देता है, तो पीड़ित व्यक्ति भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का उपयोग कर सकता है और पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित शिकायत भेज सकता है या फिर सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास क्रिमिनल कंप्लेंट फाइल कर सकता है। संक्षेप में कहें तो लिव-इन रिलेशनशिप में रहने मात्र से किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने या दूसरे पार्टनर के खिलाफ अपराध करने की छूट नहीं मिल जाती है, और कानून ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को समान रूप से आपराधिक न्याय की सुरक्षा प्रदान करता है।