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चेक बाउंस होने के आम कारण क्या हैं?

Answer By law4u team

चेक बाउंस होने के सबसे आम कारण वित्तीय, तकनीकी और दस्तावेजी त्रुटियों से जुड़े होते हैं। जब भी कोई चेक बैंक में प्रस्तुत किया जाता है और वह विभिन्न कारणों से भुगतान किए बिना वापस लौट आता है, तो इसे कानूनी भाषा में चेक बाउंस होना कहा जाता है। इसके लिए मुख्य रूप से Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आइए चेक बाउंस होने के सभी सामान्य और प्रमुख कारणों को विस्तार से समझते हैं। 1. खाते में पर्याप्त राशि का न होना यानी Insufficient Funds चेक बाउंस होने का सबसे आम और सबसे बड़ा कारण है। जब चेक जारी करने वाले व्यक्ति यानी ड्रावर के बैंक खाते में उतनी राशि उपलब्ध नहीं होती है जितने का चेक काटा गया है, तो बैंक भुगतान करने से मना कर देता है और चेक अपर्याप्त फंड के कारण बाउंस हो जाता है। यह स्थिति अक्सर वित्तीय योजना की कमी या लापरवाही के कारण उत्पन्न होती है। 2. हस्ताक्षर का मेल न खाना यानी Signature Mismatch भी एक बहुत ही सामान्य कारण है। बैंक में खाता खोलते समय ग्राहक द्वारा जो हस्ताक्षर यानी सिग्नेचर कार्ड पर दिए जाते हैं, चेक पर किए गए हस्ताक्षर उससे अलग होने पर बैंक भुगतान रोक देता है। यदि हस्ताक्षर में थोड़ा सा भी अंतर या भिन्नता पाई जाती है, तो बैंक सुरक्षा कारणों से चेक को अस्वीकार कर देता है ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके। 3. खाते का बंद होना यानी Account Closed होने पर भी चेक बाउंस हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति ने अपना बैंक खाता बंद करवा दिया है और वह पुराना या बंद हो चुका चेक किसी को भुगतान के लिए दे देता है, तो बैंक खाते के अस्तित्व में न होने के कारण उसे प्रोसेस नहीं कर पाता है और चेक बाउंस हो जाता है। 4. ओवरराइटिंग या कटिंग होना यानी Alteration and Overwriting भी चेक अस्वीकार होने का एक बड़ा कारण है। चेक पर यदि राशि, तारीख या नाम में किसी प्रकार की कटिंग, ओवरराइटिंग या फेरबदल किया गया है और उस पर जारीकर्ता के हस्ताक्षर द्वारा उसे सत्यापित नहीं किया गया है, तो बैंक ऐसे चेक का भुगतान करने से मना कर देता है। कई बैंकों के नियम बहुत सख्त होते हैं और वे किसी भी प्रकार की कटिंग वाले चेक को स्वीकार ही नहीं करते हैं। 5. शब्दों और अंकों में भिन्नता होना यानी Difference in Words and Figures चेक बाउंस होने का एक तकनीकी कारण है। चेक पर लिखी जाने वाली राशि को अंकों में और शब्दों में दोनों तरह से लिखा जाता है। यदि अंकों में लिखी गई राशि और शब्दों में लिखी गई राशि के बीच किसी भी प्रकार का अंतर या विरोधाभास होता है, तो बैंक भ्रम की स्थिति से बचने के लिए चेक को बाउंस कर देता है। 6. खाता विवरण या जानकारी में गलती यानी Account Details Mismatch होने पर भी चेक खारिज हो जाता है। यदि चेक पर खाता संख्या गलत छपी है या ग्राहक द्वारा गलत भरी गई है, या फिर बैंक का नाम और आईएफएससी कोड गलत है, तो चेक सही खाते तक नहीं पहुंच पाता है और बाउंस हो जाता है। 7. चेक की वैधता समाप्त होना यानी Stale Cheque होना भी एक आम बात है। भारतीय बैंकिंग नियमों के अनुसार कोई भी चेक जारी होने की तारीख से तीन महीने यानी नब्बे दिनों के भीतर बैंक में प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होता है। यदि कोई व्यक्ति तीन महीने की अवधि बीत जाने के बाद पुराना चेक बैंक में जमा करता है, तो बैंक उसे बाउंस घोषित कर देता है। 8. भुगतान रोकने का आदेश देना यानी Stop Payment Instructions भी चेक बाउंस होने का एक कारण बनता है। यदि चेक जारी करने वाले व्यक्ति ने बैंक को यह निर्देश दे रखा है कि अमुक चेक संख्या का भुगतान रोक दिया जाए, तो बैंक उस चेक को क्लियर नहीं करेगा। यह स्थिति अक्सर तब उत्पन्न होती है जब पक्षों के बीच कोई विवाद हो जाता है या चेक खो जाने की सूचना दी जाती है। 9. खाता फ्रीज होना या कुर्की आदेश होना यानी Account Frozen or Attachment Orders के मामलों में भी चेक बाउंस होता है। यदि अदालत के आदेश, आयकर विभाग, या किसी अन्य विधिक प्राधिकरण द्वारा संबंधित बैंक खाते को सीज या फ्रीज कर दिया गया है, या खाते पर किसी प्रकार की रोक लगाई गई है, तो बैंक खाते से कोई लेन-देन नहीं हो सकता है और उस खाते से संबंधित सभी चेक बाउंस हो जाते हैं। 10. बैंक खाताधारक की मृत्यु या दिवालिया होना भी चेक बाउंस होने की कानूनी वजह बनता है। यदि चेक जारी करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है या उसे सक्षम न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित किया जा चुका है और इस बात की जानकारी बैंक को है, तो बैंक उस चेक का भुगतान रोक देता है। इन सभी कारणों से यह स्पष्ट होता है कि चेक जारी करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। यदि Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत नोटिस भेजने के बाद भी भुगतान नहीं किया जाता है, तो चेक बाउंस होने पर गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

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