Law4u - Made in India

मोटर एक्सीडेंट कम्पेनसेशन क्लेम कौन फाइल कर सकता है?

Answer By law4u team

मोटर दुर्घटना के मामलों में मुआवजा (compensation) प्राप्त करने के लिए मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) के प्रावधानों के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के समक्ष क्लेम याचिका (claim petition) दायर की जाती है। यह जानना बेहद जरूरी है कि कानूनी तौर पर कौन-कौन लोग यह क्लेम फाइल करने के अधिकारी हैं। मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 Section 166 के अंतर्गत निम्नलिखित व्यक्ति मोटर एक्सीडेंट कम्पेनसेशन क्लेम फाइल कर सकते हैं। 1. दुर्घटना में घायल होने वाला व्यक्ति स्वयं: यदि सड़क दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति जीवित बच जाता है, भले ही वह गंभीर रूप से घायल हुआ हो या उसे शारीरिक या मानसिक विकलांगता का सामना करना पड़ा हो, तो वह स्वयं अपना क्लेम कोर्ट में फाइल कर सकता है। इस स्थिति में हर्जाने की राशि सीधे घायल व्यक्ति को ही दी जाती है, जिसमें उसके इलाज का खर्च, अस्पताल का बिल, भविष्य की चिकित्सा, दर्द और पीड़ा, तथा उसकी कमाई का नुकसान शामिल होता है। 2. दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधि: यदि दुर्भाग्यवश दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो उसके सभी कानूनी प्रतिनिधि (legal representatives) मिलकर या उनमें से कोई एक व्यक्ति अन्य सभी की तरफ से क्लेम याचिका दायर कर सकता है। भारतीय उत्तराधिकार कानूनों और न्यायिक व्यवस्था के अनुसार, कानूनी प्रतिनिधियों में मृतक के माता-पिता, पति या पत्नी, और बच्चे शामिल होते हैं। इन सभी को मृतक की मृत्यु के कारण हुए वित्तीय और मानसिक नुकसान के लिए मुआवजा पाने का कानूनी अधिकार है। 3. मृतक के आश्रित जो कानूनी प्रतिनिधि भी हैं: मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत यह आवश्यक नहीं है कि केवल वही व्यक्ति क्लेम फाइल करे जिसे संपत्ति में उत्तराधिकार मिला हो, बल्कि वे सभी व्यक्ति जो मृतक की आय पर निर्भर थे और उसके कानूनी प्रतिनिधि की श्रेणी में आते हैं, मुआवजा मांगने के हकदार हैं। यदि मृतक अविवाहित था, तो उसके माता-पिता क्लेम फाइल कर सकते हैं। यदि मृतक विवाहित था, तो उसकी पत्नी, बच्चे और माता-पिता सभी आश्रितों की श्रेणी में आते हैं और क्लेम याचिका में पक्षकार बन सकते हैं। 4. नियुक्त किया गया एजेंट या अधिकृत व्यक्ति: यदि दुर्घटना में घायल व्यक्ति शारीरिक रूप से इतना असमर्थ है कि वह खुद कोर्ट नहीं आ सकता, या मृत व्यक्ति के आश्रित बुजुर्ग या बीमार हैं और कोर्ट आने में असमर्थ हैं, तो वे अपने किसी अधिकृत एजेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी धारक, या वकील के माध्यम से क्लेम फाइल करवा सकते हैं। हालांकि, याचिका पर हस्ताक्षर और कानूनी प्रक्रिया का पालन पीड़ित या उसके कानूनी प्रतिनिधियों की सहमति से ही होता है। 5. बीमा कंपनी के खिलाफ सह-याचिकाकर्ता: कई बार दुर्घटना के शिकार व्यक्ति के परिवार के सदस्य और अन्य प्रभावित पक्षकार मिलकर सह-याचिकाकर्ता (co-petitioners) के रूप में क्लेम फाइल करते हैं। मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 Section 166 के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि सभी कानूनी प्रतिनिधि एक साथ याचिका दायर नहीं करना चाहते हैं, तो उनमें से कोई एक या कुछ प्रतिनिधि बाकी सभी को पक्षकार बनाते हुए (Proforma respondents के रूप में) क्लेम फाइल कर सकते हैं, ताकि ट्रिब्यूनल सभी के अधिकारों का निर्धारण एक ही फैसले में कर सके। 6. बीमा कंपनी या थर्ड पार्टी द्वारा वैधानिक कार्यवाही: सामान्यतः पीड़ित या उसके आश्रित ही क्लेम फाइल करते हैं, लेकिन यदि किसी दुर्घटना में कई लोग घायल हुए हैं या जनहानि हुई है, तो मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 Section 158 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत पुलिस अधिकारियों और बीमा कंपनियों की भी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं, जो दुर्घटना की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल को भेजती हैं, जिसे स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए भी क्लेम केस माना जा सकता है। 7. बिना गलती के मुआवजे के लिए आवेदन (No Fault Liability): मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 Section 140 के तहत यदि किसी दुर्घटना में किसी की मृत्यु हो जाती है या स्थाई विकलांगता आती है, तो यह साबित करने की भी आवश्यकता नहीं होती कि गलती किसकी थी। इस प्रावधान के तहत भी वही लोग क्लेम फाइल कर सकते हैं जो सामान्य मुआवजे के लिए पात्र हैं, यानी घायल व्यक्ति स्वयं या उसकी मृत्यु होने पर उसके कानूनी उत्तराधिकारी। 8. बीमा लोकपाल या अन्य मंचों की भूमिका: यद्यपि मुख्य रूप से मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ही वह प्राधिकार है जहां मोटर एक्सीडेंट कम्पेनसेशन क्लेम फाइल किया जाता है, लेकिन प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार केवल और केवल पीड़ित व्यक्ति या उसके वैध आश्रितों और कानूनी प्रतिनिधियों के पास ही सुरक्षित रहता है। किसी भी अन्य बाहरी व्यक्ति या रिश्तेदार को, जो मृतक पर आश्रित नहीं था या कानूनी प्रतिनिधि नहीं है, क्लेम फाइल करने का अधिकार कानून द्वारा नहीं दिया गया है। 9. अवयस्क (Minor) बच्चों की ओर से क्लेम: यदि दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के बच्चे नाबालिग हैं, तो उनकी ओर से उनकी मां, पिता, या अदालत द्वारा नियुक्त कोई वैध संरक्षक (legal guardian) या अगला मित्र (next friend) मोटर एक्सीडेंट कम्पेनसेशन क्लेम फाइल कर सकता है। ट्रिब्यूनल यह सुनिश्चित करता है कि नाबालिगों के हिस्से का मुआवजा उनके नाम पर फिक्स डिपॉजिट (FD) में तब तक सुरक्षित रखा जाए जब तक वे बालिग नहीं हो जाते। 10. समय सीमा और अन्य कानूनी औपचारिकताएं: मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के विभिन्न संशोधनों के अनुसार, क्लेम फाइल करते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि याचिका सही समय पर और उचित क्षेत्राधिकार वाले ट्रिब्यूनल के समक्ष दायर की जाए। क्लेम फाइल करने वाले व्यक्ति को यह साबित करना होता है कि वह मृतक का वास्तविक आश्रित या कानूनी प्रतिनिधि है, जिसके लिए उन्हें अपने पहचान पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या परिवार रजिस्टर की प्रति जैसे दस्तावेज कोर्ट में पेश करने होते हैं। इस प्रकार, केवल वे ही व्यक्ति वैध रूप से क्लेम फाइल कर सकते हैं जिनका सीधा कानूनी और वित्तीय संबंध दुर्घटना के शिकार व्यक्ति से रहा हो।

मोटर दुर्घटना Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Romesh Pratap Singh

Advocate Romesh Pratap Singh

Anticipatory Bail, Arbitration, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Corporate, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, High Court, Insurance, Labour & Service, Landlord & Tenant, Medical Negligence, Motor Accident, Muslim Law, Property, Recovery, Succession Certificate, Supreme Court

Get Advice
Advocate Deepak Gupta

Advocate Deepak Gupta

Arbitration, Banking & Finance, High Court, Documentation, Landlord & Tenant, Motor Accident, Succession Certificate, Property, Tax

Get Advice
Advocate Lawwiz Judicials

Advocate Lawwiz Judicials

Anticipatory Bail, Arbitration, Bankruptcy & Insolvency, Banking & Finance, Cheque Bounce, Civil, Consumer Court, Corporate, Criminal, High Court, NCLT, Patent, Property, Recovery, Supreme Court, Trademark & Copyright

Get Advice
Advocate Mushtaq Ahmad Musa Mujawar

Advocate Mushtaq Ahmad Musa Mujawar

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Criminal, Divorce, Domestic Violence

Get Advice
Advocate Sangada Dinesh

Advocate Sangada Dinesh

Anticipatory Bail, Arbitration, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Family, Motor Accident, Muslim Law, Property, R.T.I, Recovery, Revenue

Get Advice
Advocate Kulakanta Dandasena

Advocate Kulakanta Dandasena

Domestic Violence, Landlord & Tenant, Succession Certificate, Criminal, Consumer Court

Get Advice
Advocate Abhijit Kumar

Advocate Abhijit Kumar

Anticipatory Bail, Arbitration, Armed Forces Tribunal, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Corporate, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, GST, Domestic Violence, Family, High Court, Insurance, Labour & Service, Landlord & Tenant, Media and Entertainment, Medical Negligence, Motor Accident, Muslim Law, Property, Succession Certificate, Tax

Get Advice
Advocate Mohan Singh Bisht

Advocate Mohan Singh Bisht

Anticipatory Bail,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Criminal,Cyber Crime,Divorce,Documentation,GST,Domestic Violence,Family,Motor Accident,Property,Recovery,

Get Advice
Advocate Rajeev Kumar

Advocate Rajeev Kumar

Anticipatory Bail, Arbitration, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Civil, Consumer Court, Corporate, Criminal, Cyber Crime, Documentation, GST, Family, High Court, Insurance, Landlord & Tenant, Media and Entertainment, Medical Negligence, NCLT, Recovery, Startup, Supreme Court, Tax, Trademark & Copyright

Get Advice

मोटर दुर्घटना Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.