Answer By law4u team
सड़क दुर्घटना या एक्सीडेंट में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) के तहत मुआवजे का दावा करने का कानूनी अधिकार मृतक के कानूनी प्रतिनिधियों के पास होता है। कानून के अनुसार, मुआवजा मांगने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति तक सीमित नहीं है जो सीधे तौर पर उस पर निर्भर था, बल्कि इसमें मृतक के परिवार के कई सदस्य शामिल हो सकते हैं। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के कई स्पष्ट फैसले आ चुके हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि कौन लोग मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं। 1. मृतक के पति या पत्नी, यानी पति या पत्नी दोनों में से जीवित साथी सबसे पहले मुआवजे का दावा कर सकते हैं। यदि मृतक पुरुष है तो उसकी पत्नी, और यदि महिला है तो उसका पति इस मुआवजे का हकदार होता है। इसके अलावा यदि मृतक के बच्चे नाबालिग हैं या बालिग भी हैं और वे अपने माता-पिता पर आश्रित थे, तो बच्चे भी मुआवजे के लिए आवेदन करने का पूरा अधिकार रखते हैं। 2. मृतक के माता-पिता भी मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 की धारा 166 के तहत मुआवजे के दावेदार होते हैं। यदि कोई अविवाहित व्यक्ति सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवा देता है, तो उसके माता-पिता प्राथमिक दावेदार बन जाते हैं। न्यायालय यह मानता है कि माता-पिता अपने बच्चे के भविष्य के सहारे के रूप में उसकी ओर देखते हैं, इसलिए उन्हें हुए भावनात्मक और वित्तीय नुकसान की भरपाई का अधिकार है। 3. परिवार के अन्य सदस्य जैसे कि भाई और बहन भी कुछ विशेष परिस्थितियों में मुआवजे का दावा कर सकते हैं, बशर्ते वे यह साबित कर सकें कि वे पूरी तरह या आंशिक रूप से मृतक की आय पर निर्भर थे। हालांकि, यदि कोई ऐसा आश्रित नहीं है जो सीधे तौर पर जीवित पति, पत्नी, बच्चे या माता-पिता की श्रेणी में आता हो, तो अन्य कानूनी वारिसों को अपनी निर्भरता अदालत के सामने साबित करनी पड़ती है। 4. मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 की धारा 166 के अंतर्गत फाइल किए जाने वाले दावे में सभी कानूनी प्रतिनिधियों को एक साथ मिलकर या उनमें से किसी एक या कुछ के द्वारा अन्य सभी की तरफ से क्लेम याचिका मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण यानी मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) में दाखिल की जा सकती है। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर याचिका दाखिल नहीं करते हैं, तो याचिका दायर करने वाले व्यक्ति को बाकी बचे कानूनी वारिसों को भी उस मुकदमे में पार्टी के रूप में शामिल करना चाहिए। 5. इसके अलावा, मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 की धारा 140 के तहत नो फॉल्ट लायबिलिटी के प्रावधान के अंतर्गत भी तुरंत राहत के लिए आवेदन किया जा सकता है, जहाँ दुर्घटना साबित होते ही बिना यह देखे कि किसकी गलती थी, एक निश्चित मुआवजा राशि दी जाती है। इस राशि के लिए भी कानूनी प्रतिनिधि ही आवेदन करने के पात्र होते हैं। 6. मुआवजे की इस राशि का निर्धारण करते समय कोर्ट मृतक की आय, उसकी आयु, भविष्य में होने वाली आय की संभावना और आश्रितों की संख्या को ध्यान में रखती है। एक बार मुआवजा मिल जाने के बाद, अधिकरण उस राशि को सभी कानूनी वारिसों के बीच उनकी निर्भरता और कानून के नियमों के अनुसार विभाजित कर देता है। यदि कोई विवाद होता है कि कौन सा वारिस कितना हिस्सा पाने का हकदार है, तो इसका फैसला भी मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा ही किया जाता है।