हाँ, लेकिन केवल सीमित परिस्थितियों में। भारतीय कानून के तहत, किसी विदेशी सरकार को आम तौर पर भारतीय अदालतों में संप्रभु उन्मुक्ति प्राप्त होती है - अर्थात उसकी सहमति के बिना उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह सिद्धांत सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (धारा 86-87) से लिया गया है, जो इस उद्देश्य के लिए अभी भी लागू है। मुख्य बिंदु: • केंद्र सरकार की सहमति - किसी विदेशी राज्य पर भारतीय अदालत में मुकदमा चलाने के लिए, केंद्र सरकार की पूर्व लिखित सहमति आवश्यक है। • अपवाद - उन्मुक्ति लागू नहीं हो सकती यदि: – विदेशी राज्य ने अपनी उन्मुक्ति (स्पष्ट रूप से या आचरण द्वारा) छोड़ दी हो। – मामला संप्रभु कृत्यों (एक्टा ज्यूर इम्पेरी) के बजाय वाणिज्यिक लेनदेन या निजी कृत्यों (एक्टा ज्यूर गेस्टियोनिस) से संबंधित हो। • आपराधिक मामले - विदेशी सरकारों पर भारतीय आपराधिक अदालतों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता; केवल व्यक्ति (जैसे राजनयिक) ही मुकदमों का सामना कर सकते हैं, और तब भी राजनयिक उन्मुक्ति नियम लागू होते हैं। • अंतर्राष्ट्रीय कानून लिंक - भारत प्रतिबंधात्मक उन्मुक्ति के सिद्धांत का पालन करता है, जो विदेशी राज्यों के विरुद्ध उनकी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए मुकदमों की अनुमति देता है।
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