Answer By law4u team
अगर कोई विदेशी नागरिक भारत में कोई अपराध करता है, तो वह भारतीय क्रिमिनल कानून के तहत आता है, ठीक वैसे ही जैसे भारत के अंदर किए गए अपराधों के लिए भारतीय नागरिक आते हैं। कानूनी आधार: भारत का संविधान (आर्टिकल 14 के तहत कानून का समान संरक्षण) भारतीय न्याय संहिता भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता क्या हो सकता है: भारत में गिरफ्तारी और जांच विदेशी नागरिकों को भारत में किए गए अपराधों के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है और उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। भारतीय अदालतों में मुकदमा उन पर किसी भी दूसरे आरोपी व्यक्ति की तरह भारतीय क्रिमिनल कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाता है। सज़ा अगर दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें ये भुगतना पड़ सकता है: जेल जुर्माना जेल और जुर्माना दोनों सज़ा के बाद देश निकाला सज़ा पूरी करने के बाद (या कभी-कभी कानूनी प्रक्रिया के दौरान), उन्हें देश निकाला दिया जा सकता है। और भी नतीजे: वीज़ा कैंसल या रद्द होना भारत में दोबारा एंट्री से ब्लैकलिस्ट होना गंभीर मामलों में जांच के दौरान पासपोर्ट ज़ब्त होना डिप्लोमैटिक शामिल होना: उनकी एम्बेसी या कॉन्सुलेट को बताया जा सकता है उन्हें कॉन्सुलर मदद मिल सकती है, लेकिन इम्यूनिटी नहीं (जब तक कि वे डिप्लोमैट न हों) ज़रूरी बात: डिप्लोमैटिक इम्यूनिटी आम विदेशी टूरिस्ट या वर्कर पर लागू नहीं होती है। नतीजा: भारत में कोई अपराध करने वाला विदेशी नागरिक भारतीय कानून के तहत पूरी तरह से ज़िम्मेदार है और उसे कानूनी प्रक्रिया के अनुसार गिरफ्तार किया जा सकता है, उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है, सज़ा दी जा सकती है और डिपोर्ट किया जा सकता है।