Answer By law4u team
भारत में विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1954) के तहत कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान फोटोग्राफी के नियम और आवश्यकता को समझना बेहद जरूरी है। कानूनी रूप से, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 या उसके तहत बनाए गए नियमों में ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं है जो अनिवार्य रूप से यह कहता हो कि विवाह के समय फोटोग्राफी की जानी चाहिए। हालांकि, व्यवहारिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से फोटोग्राफी को एक आवश्यक और अनिवार्य हिस्सा बना दिया गया है ताकि विवाह का एक पुख्ता और निर्विवाद रिकॉर्ड रखा जा सके। विवाह अधिकारी (Marriage Officer) के कार्यालय में जब आप कोर्ट मैरिज के लिए जाते हैं, तो उस पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया जाता है। विवाह के दिन वर और वधू को अपने तीन गवाहों के साथ विवाह अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना पड़ता है। इस दौरान विवाह अधिकारी या उनके द्वारा अधिकृत कार्यालय का कर्मचारी जोड़े और गवाहों की तस्वीरें खींचता है। यह फोटोग्राफी इस बात का प्रमाण होती है कि विवाह के समय वे सभी व्यक्ति शारीरिक रूप से वहां मौजूद थे और उन्होंने अपनी स्वतंत्र सहमति से विवाह के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इस फोटोग्राफी की आवश्यकता के कई कानूनी और प्रशासनिक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या धोखाधड़ी को रोकना है। कई मामलों में यह देखा गया है कि लोग धोखे से या बिना सहमति के किसी का विवाह दर्ज कराने का प्रयास करते हैं। यदि विवाह के समय की तस्वीरें रिकॉर्ड में होंगी, तो यह साबित करना आसान होगा कि विवाह वैध तरीके से हुआ था और दोनों पक्ष अपनी मर्जी से उपस्थित थे। इसके अलावा, कई राज्यों के विवाह नियम यह अनिवार्य करते हैं कि विवाह के प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) पर जोड़े की तस्वीर छपी होनी चाहिए। बिना फोटोग्राफी के विवाह प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता अधूरी मानी जाती है। विवाह के समय ली जाने वाली तस्वीरें आमतौर पर विवाह रजिस्टर (Marriage Register) में भी चस्पा की जाती हैं। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 13 के अनुसार, जब विवाह अधिकारी विवाह को पंजीकृत कर देता है, तो उस पर विवाह अधिकारी, दोनों पक्षों और तीन गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं। इस रजिस्टर में जोड़े की तस्वीर लगाना एक मानक प्रशासनिक प्रक्रिया है ताकि भविष्य में पहचान को लेकर कोई संशय न रहे। यदि कोई व्यक्ति फोटोग्राफी करवाने से इनकार करता है, तो विवाह अधिकारी विवाह के पंजीकरण से इनकार कर सकता है, क्योंकि यह प्रक्रिया का एक स्वीकृत और स्थापित हिस्सा बन चुका है। इसके अतिरिक्त, यदि हम भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act, 1872) या इसके नए स्वरूप भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के दृष्टिकोण से देखें, तो तस्वीरें और डिजिटल रिकॉर्ड अदालत में एक मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाते हैं। यदि भविष्य में पति या पत्नी के बीच कोई विवाद होता है, जैसे कि विवाह की वैधता को चुनौती दी जाती है, तो विवाह के समय की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग अदालत में यह साबित करने के लिए पेश किए जा सकते हैं कि वैवाहिक समारोह विधिवत संपन्न हुआ था। इसलिए, भले ही सीधे तौर पर कानून की किसी धारा में यह शब्दशः न लिखा हो कि फोटो खींचना अनिवार्य है, लेकिन पंजीकरण की वैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से कराई जाती है। अंत में, यह सलाह दी जाती है कि कोर्ट मैरिज के लिए जाते समय किसी भी प्रकार की आनाकानी न करें और विवाह कार्यालय की सभी औपचारिकताओं का पालन करें, जिसमें फोटोग्राफी भी शामिल है। यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह आपके वैधानिक अधिकारों और आपके विवाह की वैधता की सुरक्षा के लिए एक बेहद जरूरी कदम है। विवाह अधिकारी के कार्यालय में नियमों का पालन करने से आपको भविष्य में किसी भी कानूनी अड़चन या कागजी कार्रवाई की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा और आपका विवाह पूरी तरह से सुरक्षित और वैध माना जाएगा।