Answer By law4u team
हाँ, यदि किसी व्यक्ति पर कोई आपराधिक मामला (criminal case) चल रहा है, तब भी वह पासपोर्ट बनवा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ विशेष कानूनी प्रक्रिया और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होता है। भारतीय पासपोर्ट अधिनियम, 1967 (Passports Act, 1967) के प्रावधानों के अनुसार आपराधिक मामलों में फंसे व्यक्तियों को पासपोर्ट जारी करने के संबंध में स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6(2)(f) के तहत पासपोर्ट प्राधिकारी (Passport Authority) किसी ऐसे व्यक्ति को पासपोर्ट देने से इंकार कर सकता है जिसके खिलाफ भारत की किसी अदालत में कोई आपराधिक मामला लंबित (pending) हो। यदि अदालत में कोई मामला विचाराधीन है और अदालत ने अभियुक्त की देश छोड़ने पर रोक लगा रखी है, तो पासपोर्ट अधिकारी आवेदन को अस्वीकार कर सकता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले (सुनील कुमार भारद्वाज बनाम भारत सरकार मामले और अन्य दिशानिर्देशों) के अनुसार, केवल आपराधिक मामला दर्ज होने मात्र से हमेशा के लिए पासपोर्ट के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति पर क्रिमिनल केस चल रहा है और उसे पासपोर्ट की आवश्यकता है, तो उसे सबसे पहले उस संबंधित अदालत से औपचारिक अनुमति (court permission) प्राप्त करनी होगी जिसमें उसका मुकदमा चल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत अभियुक्त को अदालत में एक आवेदन (application) देना होता है जिसमें उसे यह बताना होता है कि उसे किस देश की यात्रा करनी है, यात्रा का उद्देश्य क्या है, और वह कितने दिनों के लिए बाहर जा रहा है। अदालत सभी तथ्यों और मामलों की गंभीरता को देखने के बाद एक अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate - NOC) या पासपोर्ट जारी करने की विशेष अनुमति आदेश पारित करती है। अदालत इस अनुमति आदेश में एक निश्चित अवधि (जैसे एक वर्ष, दो वर्ष, या पांच वर्ष) के लिए पासपोर्ट जारी करने की अनुमति दे सकती है, या मामले की सुनवाई के अनुसार शर्तें तय कर सकती है। एक बार अदालत से अनुमति का आदेश मिलने के बाद, उस आदेश की मूल प्रति को पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) में पासपोर्ट आवेदन के साथ जमा कराना होता है। इसके अलावा, पासपोर्ट कार्यालय पुलिस सत्यापन (police verification) की प्रक्रिया पूरी करता है। यदि आवेदक के खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट (non-bailable warrant) लंबित है या कोर्ट ने देश छोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है, तो पुलिस सत्यापन के दौरान प्रतिकूल रिपोर्ट आ सकती है और पासपोर्ट आवेदन रद्द किया जा सकता है। यदि अदालत ने अभियुक्त को किसी मामले में दोषी ठहरा दिया है और उसे सजा सुनाई गई है, और सजा की अवधि कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक है, तो पासपोर्ट अधिनियम के तहत सजा पूरी होने या सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत से अपील में राहत मिलने तक नया पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता है। इसके विपरीत, यदि मामला अभी केवल ट्रायल पर है (यानी फैसला नहीं आया है) और अदालत ने यात्रा की अनुमति दे दी है, तो आमतौर पर सीमित वैधता (limited validity passport) वाला पासपोर्ट जारी किया जाता है, जो आमतौर पर एक वर्ष या अदालत द्वारा निर्धारित अवधि के लिए ही वैध होता है। पासपोर्ट मिलने के बाद भी यह शर्त होती है कि आवेदक को विदेश यात्रा करने से पहले हर बार अदालत से विशिष्ट अनुमति लेनी पड़ सकती है, यदि अदालत के मूल आदेश में ऐसा निर्देश दिया गया हो। संक्षेप में कहें तो, क्रिमिनल केस होने पर पासपोर्ट मिलना असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए कानूनी रास्ता यही है कि आप अपने मुकदमे की सुनवाई कर रही अदालत से अनुमति लें, अदालत के आदेश को पासपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत करें, और पासपोर्ट अधिकारियों को संतुष्ट करें कि आप न्याय प्रक्रिया से भागेंगे नहीं और सुनवाई की तारीखों पर अदालत में पेश होते रहेंगे।