Law4u - Made in India

कोर्ट मैरिज के बाद पत्नी को क्या अधिकार मिलते हैं?

Answer By law4u team

भारत में कोर्ट मैरिज विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1955) के तहत की जाती है। इस अधिनियम के अंतर्गत विवाह करने के बाद पत्नी को वे सभी कानूनी, सामाजिक और वित्तीय अधिकार प्राप्त होते हैं जो पारंपरिक या धार्मिक रीति-रिवाजों से शादी करने वाली किसी भी पत्नी को मिलते हैं। कोर्ट मैरिज केवल विवाह संपन्न कराने की एक कानूनी प्रक्रिया है, और इसके बाद पति-पत्नी का रिश्ता पूरी तरह से वैध हो जाता है। कोर्ट मैरिज के तुरंत बाद पत्नी को मिलने वाले अधिकारों को विस्तार से नीचे समझाया गया है। 1. कानूनी पत्नी का दर्जा और सामाजिक मान्यता: कोर्ट मैरिज का प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) मिलने के बाद महिला को आधिकारिक तौर पर कानूनी पत्नी का दर्जा मिल जाता है। यह प्रमाण पत्र इस बात का पुख्ता सबूत होता है कि दोनों का विवाह कानूनी रूप से वैध है। इस दस्तावेज के आधार पर पत्नी अपने पति के नाम का उपयोग अपने दस्तावेजों में कर सकती है और समाज में उसे पूरी सामाजिक और कानूनी मान्यता मिलती है। 2. भरण-पोषण का अधिकार: हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम (Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1955) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure, 1955) की धारा 125 के तहत पत्नी को अपने पति से भरण-पोषण (Maintenance) पाने का पूरा अधिकार होता है। यदि पति अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने से मना करता है या उसे छोड़ देता है, तो पत्नी कोर्ट से गुजारा भत्ता की मांग सकती है। विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1955) के तहत भी अदालत पति को पत्नी के भरण-पोषण का आदेश दे सकती है। 3. वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना और आपसी सहवास का अधिकार: हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act, 1955) या विशेष विवाह अधिनियम के तहत पत्नी को अपने पति के साथ रहने का अधिकार मिलता है। यदि पति बिना किसी ठोस कारण के पत्नी को छोड़ देता है या साथ रहने से मना करता है, तो पत्नी कोर्ट में वैवाहिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए मुकदमा दायर कर सकती है। इसके अलावा, जबरन या बिना सहमति के अलग रहने पर कानूनी सहारा लेने का अधिकार भी पत्नी के पास होता है। 4. पैतृक संपत्ति और पति की संपत्ति में अधिकार: कोर्ट मैरिज करने के बाद भी पत्नी के अपने माता-पिता की संपत्ति में अधिकार बने रहते हैं, क्योंकि विवाह से पैतृक अधिकार समाप्त नहीं होते हैं। इसके साथ ही, यदि पति की मृत्यु हो जाती है, तो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act, 1956) या संबंधित उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार पत्नी को पति की संपत्ति में पहला और मुख्य कानूनी उत्तराधिकार मिलता है। यदि पति वसीयत छोड़े बिना मर जाता है, तो पत्नी और बच्चों का संपत्ति पर पूरा अधिकार होता है। 5. घरेलू हिंसा के खिलाफ कानूनी संरक्षण: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) के तहत कोर्ट मैरिज करने वाली पत्नी को भी पूरा संरक्षण मिलता है। यदि ससुराल पक्ष या पति द्वारा पत्नी के साथ शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या मौखिक शोषण किया जाता है, तो वह इस कानून के तहत तुरंत कोर्ट में जाकर न्याय और सुरक्षा की मांग सकती है। 6. तलाक और न्यायिक अलगाव का अधिकार: विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act, 1955) के प्रावधानों के तहत पत्नी को तलाक (Divorce) लेने का भी समान अधिकार प्राप्त है। यदि पति क्रूरता करता है, व्यभिचार में लिفت है, या बिना किसी कारण के सात साल से अधिक समय से लापता है, तो पत्नी कानूनी रूप से तलाक की अर्जी दे सकती है। इसके अलावा, आपसी सहमति से भी तलाक लेने का कानूनी अधिकार दोनों पक्षों के पास समान रूप से होता है। 7. बच्चों की कस्टडी और उत्तराधिकार का अधिकार: कोर्ट मैरिज से उत्पन्न होने वाले बच्चों को पूरी तरह से वैध संतान माना जाता है। बच्चों की परवरिश, शिक्षा और उनकी कस्टडी (Custody) के मामले में माता और पिता दोनों के समान अधिकार होते हैं। वैवाहिक विवाद होने की स्थिति में पत्नी बच्चों की कस्टडी के लिए अदालत में दावा कर सकती है, और अदालत बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखते हुए फैसला देती है। बच्चों को माता-पिता दोनों की संपत्ति में उत्तराधिकार का पूरा हक मिलता है। 8. नाम बदलने और पहचान से जुड़े अधिकार: विवाह के बाद पत्नी अपनी मर्जी से अपने दस्तावेजों जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खाते और शैक्षणिक प्रमाण पत्र में अपने पति का नाम और उपनाम (Surname) जोड़ सकती है। इसके लिए कोर्ट मैरिज प्रमाण पत्र एक मजबूत कानूनी दस्तावेज का काम करता है, जिसे सरकारी विभागों में प्रस्तुत करके आसानी से नाम और पता बदला जा सकता है। 9. उत्तराधिकार और बीमा लाभ का अधिकार: यदि पति ने अपने जीवन बीमा (Life Insurance), भविष्य निधि (Provident Fund), ग्रेच्युटी या बैंक खातों में नॉमिनी के रूप में पत्नी का नाम दर्ज कराया है, तो पति की मृत्यु के बाद उन सभी वित्तीय लाभों को प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार पत्नी का होता है। यदि नॉमिनी नहीं भी है, तब भी कानूनी पत्नी होने के नाते वह इन दावों पर कानूनी हक जता सकती है। इन सभी अधिकारों के अलावा, किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अन्याय की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न प्रावधानों के तहत पत्नी पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। कोर्ट मैरिज किसी भी महिला को उसके वैवाहिक जीवन में पूर्ण सुरक्षा और अधिकार प्रदान करती है।

कोर्ट मैरिज Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate D K Nirankari

Advocate D K Nirankari

Cheque Bounce, Civil, Criminal, Family, Revenue

Get Advice
Advocate Amit Malakar

Advocate Amit Malakar

Anticipatory Bail, Arbitration, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Corporate, Court Marriage, Customs & Central Excise, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, GST, Domestic Violence, Family, High Court, Immigration, Labour & Service, Landlord & Tenant, Medical Negligence, Motor Accident, Property, RERA, Succession Certificate, Trademark & Copyright, Wills Trusts, Revenue

Get Advice
Advocate Abdul Rahim Abdul Majid Mulla

Advocate Abdul Rahim Abdul Majid Mulla

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, Insurance, Labour & Service, Landlord & Tenant, Motor Accident, Muslim Law, Property, R.T.I, Succession Certificate

Get Advice
Advocate Sushil Kumar Tiwari

Advocate Sushil Kumar Tiwari

Arbitration, Armed Forces Tribunal, Bankruptcy & Insolvency, Cyber Crime, Criminal, Court Marriage, NCLT, Recovery, Medical Negligence, Landlord & Tenant, Labour & Service, Supreme Court, Succession Certificate

Get Advice
Advocate Uday A Mahajan

Advocate Uday A Mahajan

Civil, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Property

Get Advice
Advocate Mosifa Ajmeri

Advocate Mosifa Ajmeri

Cheque Bounce, Court Marriage, Divorce, Family, Anticipatory Bail

Get Advice
Advocate Mohit Kumar Sharma

Advocate Mohit Kumar Sharma

Civil, Breach of Contract, Cheque Bounce, Divorce, Family, Recovery

Get Advice
Advocate Sanjeev Dailwar

Advocate Sanjeev Dailwar

Criminal, Revenue, Motor Accident, Civil, Cheque Bounce

Get Advice
Advocate Vishakha Mangesh Jadhav

Advocate Vishakha Mangesh Jadhav

Anticipatory Bail,High Court,Domestic Violence,Wills Trusts,Cheque Bounce,

Get Advice
Advocate vipul Ajwaliya

Advocate vipul Ajwaliya

Anticipatory Bail,Arbitration,Armed Forces Tribunal,Bankruptcy & Insolvency,Banking & Finance,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Corporate,Court Marriage,Customs & Central Excise,Criminal,Cyber Crime,Divorce,Documentation,GST,Domestic Violence,Family,High Court,Immigration,Insurance,International Law,Labour & Service,Landlord & Tenant,Media and Entertainment,Medical Negligence,Motor Accident,Muslim Law,NCLT,Patent,Property,R.T.I,Recovery,RERA,Startup,Succession Certificate,Supreme Court,Tax,Trademark & Copyright,Wills Trusts,Revenue

Get Advice

कोर्ट मैरिज Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.