Law4u - Made in India

कपल्स कैसे वेरिफ़ाई कर सकते हैं कि उनकी कोर्ट मैरिज लीगली रजिस्टर्ड है या नहीं?

Answer By law4u team

भारत में कोर्ट मैरिज करने वाले या करने की सोच रहे कपल्स के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि उनकी शादी कानूनन सही तरीके से रजिस्टर हुई है या नहीं। आज के समय में कई बार फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट या अवैध तरीकों से शादी कराने वाले लोग सक्रिय रहते हैं, इसलिए कपल्स को खुद यह तसल्ली कर लेनी चाहिए कि उनका विवाह कानूनी रूप से वैध है। आप अपनी कोर्ट मैरिज के रजिस्ट्रेशन को वेरिफ़ाई करने के लिए कई कानूनी और प्रशासनिक कदम उठा सकते हैं। 1. सबसे पहला और सबसे भरोसेमंद तरीका यह है कि आप उस मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफिस या विवाह अधिकारी के कार्यालय में खुद जाएं जहां आपकी शादी का रजिस्ट्रेशन हुआ था। हर जिले में विवाह रजिस्ट्रार या मैरिज ऑफिसर (जो आमतौर पर उप-पंजीयक यानी Sub-Registrar होते हैं) का कार्यालय होता है। आप अपने मैरिज सर्टिफिकेट की असली कॉपी के साथ वहां जाकर मैरिज रजिस्टर की किताबों से उसका मिलान करवा सकते हैं। रजिस्ट्रार के पास रखे जाने वाले मैरिज रजिस्टर में आपकी शादी की पूरी प्रविष्टि दर्ज होती है, जिसमें गवाहों के हस्ताक्षर और दोनों पक्षों के दस्तखत होते हैं। 2. भारत के अधिकांश राज्यों में अब मैरिज रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। आप अपने संबंधित राज्य के आधिकारिक विवाह पंजीकरण पोर्टल पर जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक या अन्य राज्यों के अपने आधिकारिक ई-डिस्ट्रिक्ट या पोर्टल होते हैं। इन पोर्टल्स पर 'Verify Marriage Certificate' या 'Search Registered Marriage' का एक विकल्प होता है। वहां आपको अपना मैरिज सर्टिफिकेट नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, या शादी की तारीख और पति-पत्नी का नाम दर्ज करना होगा। यदि आपकी शादी वैध रूप से रजिस्टर्ड है, तो सिस्टम में उसका डिजिटल रिकॉर्ड दिखाई देगा और आप सर्टिफिकेट को डाउनलोड या वेरिफ़ाई कर सकेंगे। 3. कोर्ट मैरिज मुख्य रूप से स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 (Special Marriage Act, 1954) के तहत होती है। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, जब कोई कपल कोर्ट मैरिज के लिए आवेदन करता है, तो मैरिज ऑफिसर द्वारा एक नोटिस बोर्ड पर नोटिस चस्पा किया जाता है और 30 दिनों की अवधि के भीतर आपत्तियों को आमंत्रित किया जाता है। यदि कोई आपत्ति नहीं आती है, तो मैरिज ऑफिसर द्वारा दोनों पक्षों और तीन गवाहों की उपस्थिति में विवाह संपन्न कराया जाता है और मैरिज सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। आपको यह चेक करना चाहिए कि क्या आपकी शादी की पूरी प्रक्रिया स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के नियमों के तहत ही पूरी हुई थी या नहीं। 4. आपको अपने मैरिज सर्टिफिकेट पर दिए गए विवरण को बहुत ध्यान से जांचना चाहिए। एक वैध और कानूनी रूप से रजिस्टर्ड मैरिज सर्टिफिकेट पर संबंधित मैरिज ऑफिसर के डिजिटल या फिजिकल हस्ताक्षर, एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर, जारी करने की तारीख, दोनों पक्षों के सही नाम, उनके पते और गवाहों के विवरण स्पष्ट रूप से होने चाहिए। यदि सर्टिफिकेट पर कोई मुहर या हस्ताक्षर गायब हैं, या यदि वह किसी अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा जारी किया गया प्रतीत होता है, तो वह फर्जी हो सकता है। 5. यदि आप ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से संतुष्ट नहीं होते हैं, या आपको संदेह है कि आपका सर्टिफिकेट फर्जी है, तो आप अपने क्षेत्र के जिला न्यायालय या रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय में आरटीआई (RTI) यानी सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन कर सकते हैं। आप लिखित रूप में यह जानकारी मांग सकते हैं कि आपके मैरिज रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर क्या सरकारी रिकॉर्ड में यह शादी दर्ज है या नहीं। इसके अलावा, आप अपने वकील के माध्यम से भी संबंधित विभाग से इसकी सत्यता की पुष्टि करवा सकते हैं। 6. यह भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कोर्ट मैरिज के लिए न्यूनतम आयु पूरी होनी चाहिए, यानी वर की आयु कम से कम 21 वर्ष और वधू की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके अलावा, दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति होनी चाहिए और विवाह के समय कोई भी पक्ष पहले से विवाहित नहीं होना चाहिए, यानी पिछला कोई वैध पति या पत्नी जीवित नहीं होना चाहिए, सिवाय इसके कि पुराना तलाक हो चुका हो या साथी की मृत्यु हो चुकी हो। यदि इनमें से कोई शर्त पूरी नहीं होती है, तो भले ही आपको कोई कागज मिल गया हो, कानून की नजर में वह विवाह शून्य या अमान्य माना जाएगा। 7. यदि किसी जांच में यह पता चलता है कि आपका मैरिज सर्टिफिकेट फर्जी है या नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो आप तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट मैरिज को केवल प्रशासनिक रूप से ही नहीं बल्कि कानूनी रूप से भी पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के तहत होना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में उत्तराधिकार, संपत्ति, वीजा या बच्चों की वैधता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कानूनी अड़चन का सामना न करना पड़े।

कोर्ट मैरिज Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Kajal

Advocate Kajal

Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Court Marriage, Criminal, Divorce, Family

Get Advice
Advocate Gurudayal Singh

Advocate Gurudayal Singh

Civil, Consumer Court, Criminal, Labour & Service, Revenue

Get Advice
Advocate Parvind Kumar

Advocate Parvind Kumar

Anticipatory Bail,Arbitration,Armed Forces Tribunal,Bankruptcy & Insolvency,Banking & Finance,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Corporate,Court Marriage,Customs & Central Excise,Criminal,Cyber Crime,Divorce,Documentation,Domestic Violence,Family,High Court,Immigration,Insurance,International Law,Labour & Service,Landlord & Tenant,Media and Entertainment,Medical Negligence,Motor Accident,Muslim Law,NCLT,Patent,Property,R.T.I,Recovery,RERA,Startup,Succession Certificate,Trademark & Copyright,Wills Trusts,Supreme Court,

Get Advice
Advocate Ahsan Malik

Advocate Ahsan Malik

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Criminal, Cyber Crime, Muslim Law

Get Advice
Advocate Jaykishan Devani

Advocate Jaykishan Devani

Anticipatory Bail, Arbitration, Armed Forces Tribunal, Bankruptcy & Insolvency, Banking & Finance, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Corporate, Court Marriage, Customs & Central Excise, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, GST, Domestic Violence, Family, High Court, Immigration, Insurance, International Law, Labour & Service, Landlord & Tenant, Media and Entertainment, Medical Negligence, Motor Accident, Muslim Law, NCLT, Patent, Property, R.T.I, Recovery, RERA, Startup, Succession Certificate, Supreme Court, Tax, Trademark & Copyright, Wills Trusts

Get Advice
Advocate Raj Shukla

Advocate Raj Shukla

Civil, Criminal, Cyber Crime, High Court, Revenue

Get Advice
Advocate Juned Sandhi

Advocate Juned Sandhi

Cheque Bounce, Court Marriage, Criminal, Divorce, Revenue

Get Advice
Advocate Dhruveshsinh Mahida

Advocate Dhruveshsinh Mahida

Cheque Bounce, Civil, Criminal, Revenue, Banking & Finance

Get Advice
Advocate Shreyank Mankani

Advocate Shreyank Mankani

Anticipatory Bail,Breach of Contract,Cheque Bounce,Child Custody,Civil,Consumer Court,Court Marriage,Criminal,Divorce,Domestic Violence,Family,High Court,Landlord & Tenant,Recovery

Get Advice
Advocate Anmol Deepak Chordiya

Advocate Anmol Deepak Chordiya

Criminal, Anticipatory Bail, Banking & Finance, Civil, Cheque Bounce, Family, High Court, Motor Accident, Property

Get Advice

कोर्ट मैरिज Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.