Answer By law4u team
दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) उस कानूनी स्थिति को कहते हैं जिसमें एक व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग देशों का नागरिक होता है। दोहरी नागरिकता प्राप्त व्यक्ति को दोनों देशों के कानूनों के तहत नागरिक के अधिकार, कर्तव्य, पासपोर्ट और अन्य सरकारी सुविधाएं प्राप्त होती हैं। ऐसे व्यक्ति दोनों देशों में मतदान कर सकते हैं, संपत्ति खरीद सकते हैं और बिना वीजा के यात्रा या निवास कर सकते हैं। हालांकि, इसके साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं, जैसे कि दोनों देशों के प्रति वफादारी और कुछ मामलों में दोनों देशों में कर (Tax) चुकाना। भारत का संविधान दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है। भारत का संविधान (Constitution of India) का अनुच्छेद 9 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त (Terminate) हो जाती है। भारतीय कानून एकल नागरिकता (Single Citizenship) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना है। भारत में यह माना जाता है कि एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही देश के प्रति पूरी तरह निष्ठावान हो सकता है। भारतीय मूल के लोगों (Persons of Indian Origin) और अनिवासी भारतीयों (NRIs) की विदेश में रहने के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए, भारत सरकार ने नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) में संशोधन करके वर्ष 2005 में प्रवासी भारतीय नागरिकता (Overseas Citizenship of India - OCI) योजना की शुरुआत की थी। कई लोग इसे गलती से दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं, लेकिन यह वास्तव में दोहरी नागरिकता नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार का दीर्घकालिक वीजा (Long-term Visa Status) है। प्रवासी भारतीय नागरिकता (OCI) धारक को कई प्रकार के विशेष अधिकार मिलते हैं, लेकिन इसे पूर्ण नागरिकता नहीं कहा जा सकता है। ओसीआई कार्डधारकों को भारत आने के लिए बहु-प्रवेश (Multi-entry), आजीवन वीजा (Lifelong Visa) मिलता है, उन्हें भारत में आर्थिक, वित्तीय और शैक्षणिक क्षेत्रों में कई अधिकार प्राप्त हैं, और उन्हें देश में पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, ओसीआई कार्डधारकों के पास कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक अधिकार नहीं होते हैं। वे भारत में लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते हैं, वे भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, न्यायाधीश या किसी अन्य संवैधानिक पद पर आसीन नहीं हो सकते हैं, और वे कृषि भूमि (Agricultural Land) नहीं खरीद सकते हैं। यदि कोई भारतीय नागरिक किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसे कानूनी रूप से भारतीय पासपोर्ट को तुरंत संबंधित भारतीय दूतावास या पासपोर्ट कार्यालय में सरेंडर (Surrender) करना होगा। विदेशी नागरिकता प्राप्त करने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति अपने भारतीय पासपोर्ट का उपयोग करना जारी रखता है या उसे छुपाता है, तो उसे नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955) के तहत भारी आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। सरेंडर करने के बाद, व्यक्ति को अपने भारतीय पासपोर्ट को रद्द करने का प्रमाण पत्र (Surrender Certificate) प्राप्त करना होता है, जो भविष्य में ओसीआई कार्ड के लिए आवेदन करते समय अनिवार्य रूप से जमा करना पड़ता है। संक्षेप में कहा जाए तो भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है और कानून का उल्लंघन करने पर नागरिकता समाप्त कर दी जाती है। भारत सरकार केवल एकल नागरिकता के सिद्धांत का पालन करती है, और विदेशों में बसे भारतीयों की सुविधा के लिए केवल ओसीआई (OCI) योजना का विकल्प प्रदान करती है, जो किसी भी स्थिति में दोहरी नागरिकता के समान नहीं है।