Answer By law4u team
भारतीय नागरिकों के लिए विदेश में स्थित भारतीय दूतावास यानी एम्बेसी और वाणिज्य दूतावास यानी कॉन्सुलेट की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यापक होती है। जब भी कोई भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश में यात्रा कर रहा होता है, वहां पढ़ाई कर रहा होता है, नौकरी कर रहा होता है या स्थायी रूप से निवास कर रहा होता है, तो वह देश उसके लिए एक नया और अनजान परिवेश होता है। ऐसे में विदेश मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ये मिशन विदेशों में भारत सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करते हैं। सबसे पहली और प्रमुख भूमिका संकट के समय सहायता प्रदान करना है। यदि विदेश में किसी भारतीय नागरिक का पासपोर्ट खो जाता है, चोरी हो जाता है या नष्ट हो जाता है, तो एम्बेसी या कॉन्सुलेट उसे तुरंत आपातकालीन यात्रा दस्तावेज या नया पासपोर्ट जारी करने में मदद करता है। इसके अलावा, यदि कोई नागरिक किसी विदेशी देश में दुर्घटना का शिकार हो जाता है, गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है, या किसी प्राकृतिक आपदा या युद्ध जैसी स्थिति में फंस जाता है, तो ये मिशन उसे सुरक्षित निकालने, स्थानीय अस्पतालों से संपर्क करने और भारत में उसके परिवार तक सूचना पहुंचाने का कार्य करते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण भूमिका कानूनी और न्यायिक सहायता से जुड़ी है। यदि विदेश में किसी भारतीय नागरिक को स्थानीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है, तो वियना कॉन्सुलरी संबंधों पर कन्वेंशन के अनुसार उसे भारतीय दूतावास से संपर्क करने का अधिकार होता है। ऐसी स्थिति में कॉन्सुलेट के अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि उस नागरिक के साथ स्थानीय कानूनों के तहत निष्पक्ष व्यवहार किया जाए, उसे स्थानीय भाषा में अनुवादक मिले और एक योग्य वकील तक उसकी पहुंच हो। हालांकि एम्बेसी स्थानीय अदालतों में किसी नागरिक का केस नहीं लड़ सकती और न ही स्थानीय कानून तोड़ने पर उसे छुड़ा सकती है, लेकिन वह जेल में बंद नागरिक से मिलकर उसकी भलाई की पूछताछ करती है और मानवाधिकारों का हनन न हो यह सुनिश्चित करती है। तीसरी भूमिका वाणिज्यिक और दस्तावेजों के सत्यापन से संबंधित है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों को अक्सर अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र या पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेजों को भारत या उस विदेशी देश में इस्तेमाल करने के लिए सत्यापित यानी अटेस्ट कराना होता है। एम्बेसी और कॉन्सुलेट इन सभी दस्तावेजों का सत्यापन करने का आधिकारिक कार्य करते हैं। इसके अलावा, विदेशी धरती पर जन्म लेने वाले भारतीय मूल के बच्चों का पंजीकरण और उन्हें नागरिकता से जुड़े मामलों में मार्गदर्शन देना भी इन्हीं का काम है। चौथी भूमिका आपातकालीन वित्तीय संकट और मृत्यु के मामलों में होती है। यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में पूरी तरह असहाय हो जाता है और उसके पास खाने या रहने के पैसे नहीं बचते, तो भारतीय कम्युनिटी वेलफेयर फंड के माध्यम से उसे प्रारंभिक वित्तीय सहायता या भारत लौटने का विमान टिकट प्रदान किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि दुर्भाग्यवश किसी भारतीय नागरिक की विदेश में मृत्यु हो जाती है, तो एम्बेसी स्थानीय अधिकारियों से समन्वय करके उसके शव को भारत भेजने यानी रिपैट्रिएशन की प्रक्रिया को पूरा करती है, या स्थानीय रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कराने में सहायता प्रदान करती है। पांचवीं भूमिका मतदान और नागरिक अधिकारों से जुड़ी है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत विदेशों में रह रहे अनिवासी भारतीयों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने का अधिकार प्राप्त है। एम्बेसी और कॉन्सुलेट इन चुनावों के दौरान पंजीकरण और डाक मतपत्रों या अन्य माध्यमों से मतदान की प्रक्रिया को संचालित करने में निर्वाचन आयोग के साथ समन्वय करते हैं। अंत में, ये मिशन भारत और उस मेजबान देश के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करते हुए एक सांस्कृतिक सेतु का काम करते हैं, जिससे वहां रह रहे भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने में मदद मिलती है। भारतीय नागरिकों को यह हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी भी विदेशी देश में आपात स्थिति उत्पन्न होने पर वहां का भारतीय मिशन ही उनका सबसे पहला और मजबूत सहारा होता है।