Law4u - Made in India

क्या कुछ क्रिमिनल मामलों में भारतीय कानून भारत के बाहर भी लागू हो सकते हैं?

Answer By law4u team

हाँ, भारतीय कानून कुछ विशिष्ट क्रिमिनल मामलों में भारत के बाहर भी लागू हो सकते हैं। इस सिद्धांत को भारतीय आपराधिक कानून में एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल ज्यूरिडिक्शन यानी अलौकिक या क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार कहा जाता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय दंड संहिता (IPC), और कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) के प्रावधानों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि कुछ खास परिस्थितियों में भारतीय अदालतों को देश की सीमाओं से बाहर किए गए अपराधों पर भी विचार करने और सजा देने का अधिकार है। इस विषय का मुख्य आधार भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 3 तथा धारा 4 में दिया गया है। इसके अलावा CrPC की धारा 188 भी ऐसे मामलों के संचालन और ट्रायल के लिए प्रक्रिया तय करती है। यहाँ इस बात को विस्तार से समझना आवश्यक है कि कौन से मामले और व्यक्ति भारत के बाहर किए जाने पर भी भारतीय कानून के दायरे में आते हैं। 1. भारत के बाहर किया गया अपराध लेकिन आरोपी भारतीय नागरिक हो। यदि कोई भी भारत का नागरिक भारत की भौगोलिक सीमा से बाहर किसी अन्य देश में जाकर कोई ऐसा कृत्य करता है जो भारत के कानून के तहत अपराध है, तो उस पर भारतीय कानूनों के अनुसार ही मुकदमा चलाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में जाकर हत्या, धोखाधड़ी या किसी अन्य गंभीर अपराध को अंजाम देता है, तो उस पर भारत के बाहर किए गए अपराध के लिए भी भारतीय अदालतों में कार्रवाई की जा सकती है, भले ही वह कृत्य उस देश के कानून में अपराध न हो या अलग तरीके से दंडनीय हो। 2. किसी भी व्यक्ति द्वारा भारत में स्थित कंप्यूटर संसाधन को लक्षित करना या साइबर अपराध करना। BNS और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत यह स्पष्ट है कि यदि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी देश का नागरिक क्यों न हो, भारत में स्थित किसी कंप्यूटर सर्वर, डेटा या कंप्यूटर सिस्टम को प्रभावित करता है या उससे जुड़ा कोई साइबर अपराध करता है, तो उसे भारतीय कानून के तहत दंडित किया जा सकता है। इस प्रकार के मामलों में अपराधी की राष्ट्रीयता मायने नहीं रखती, बल्कि अपराध का प्रभाव कहाँ पड़ा यह महत्वपूर्ण होता है। 3. भारत सरकार के किसी जहाज या विमान पर किया गया अपराध। यदि कोई अपराध भारतीय ध्वज फैराने वाले किसी समुद्री जहाज पर या भारत में पंजीकृत किसी विमान पर किया जाता है, तो वह अपराध चाहे दुनिया के किसी भी हिस्से में समुद्र या हवा में हुआ हो, ऐसा माना जाता है जैसे कि वह भारत की भूमि पर ही किया गया हो। ऐसे मामलों में भी भारतीय आपराधिक कानून पूरी तरह से लागू होते हैं और आरोपी व्यक्ति पर भारतीय अदालतों में मुकदमा चलाया जाता है। 4. विदेशी धरती पर किसी विदेशी व्यक्ति द्वारा भारत या किसी भारतीय नागरिक के खिलाफ साजिश रचना। यदि कोई विदेशी नागरिक भारत के बाहर रहते हुए भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने, या किसी भारतीय नागरिक के खिलाफ गंभीर अपराध करने की साजिश रचता है, तो ऐसे मामलों में भी भारतीय कानून लागू हो सकते हैं, बशर्ते इस संबंध में केंद्रीय सरकार की पूर्व अनुमति या मंजूरी प्राप्त हो। CrPC की धारा 188 के अनुसार, जब भारत का कोई नागरिक भारत के बाहर कोई अपराध करता है, तो उसके खिलाफ भारत में किसी भी न्यायालय में तब तक जांच या ट्रायल शुरू नहीं किया जा सकता जब तक कि केंद्र सरकार इस संबंध में अपनी आधिकारिक मंजूरी या स्वीकृति न दे दे। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जा सके। हालांकि, पुलिस प्रारंभिक जांच या एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है, लेकिन अदालत में चार्जशीट पेश करने और বিচার प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती है। संक्षेप में, भारतीय आपराधिक कानून केवल भारत की भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कुछ परिस्थितियों में सार्वभौमिक या एक्स्ट्रा-टेरिटोरियल प्रभाव रखते हैं ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, भारतीय परिसंपत्तियों की रक्षा की जा सके, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के हितों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर रोक लगाई जा सके।

अंतरराष्ट्रीय कानून Verified Advocates

Get expert legal advice instantly.

Advocate Chandan Kumar Mohalik

Advocate Chandan Kumar Mohalik

Cyber Crime, Family, Domestic Violence, Cheque Bounce, Consumer Court

Get Advice
Advocate Ayub Khan

Advocate Ayub Khan

Criminal, Family, Property, Civil

Get Advice
Advocate Amaresh Rath

Advocate Amaresh Rath

Family, Domestic Violence, Criminal, Banking & Finance, Arbitration, Civil, Breach of Contract, Cheque Bounce, Consumer Court, Court Marriage, Landlord & Tenant, Motor Accident, R.T.I, Property, Divorce

Get Advice
Advocate Marimuthu N

Advocate Marimuthu N

Civil, Cheque Bounce, Family, Divorce, Property, R.T.I, High Court, Criminal, Domestic Violence, Documentation

Get Advice
Advocate Umanath Dash

Advocate Umanath Dash

Divorce, Family, Civil, Criminal, Tax, Corporate, Cheque Bounce, Banking & Finance, Property, RERA, GST, R.T.I, Anticipatory Bail, High Court, Startup, Revenue

Get Advice
Advocate Akshay Thakur

Advocate Akshay Thakur

Anticipatory Bail, Breach of Contract, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Consumer Court, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, Labour & Service, Motor Accident, Wills Trusts, Revenue

Get Advice
Advocate Javed Ahmad

Advocate Javed Ahmad

Anticipatory Bail, Cheque Bounce, Child Custody, Civil, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Documentation, Domestic Violence, Family, High Court, Landlord & Tenant, Motor Accident, Muslim Law, Recovery, Succession Certificate, Revenue

Get Advice
Advocate Ashish Singh

Advocate Ashish Singh

Anticipatory Bail, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, High Court

Get Advice
Advocate Sanjay Nagalkar

Advocate Sanjay Nagalkar

Civil, Criminal, Divorce, Domestic Violence, Family

Get Advice
Advocate Bhimrao Jagtap

Advocate Bhimrao Jagtap

Anticipatory Bail, Civil, Cheque Bounce, Banking & Finance, Court Marriage, Criminal, Cyber Crime, Divorce, Domestic Violence, Family, Insurance, Motor Accident, Muslim Law, Succession Certificate, Consumer Court, Property, R.T.I, Recovery, Wills Trusts, Child Custody, Documentation, Labour & Service, Medical Negligence, International Law, High Court, Corporate, Breach of Contract, Arbitration, Revenue, Trademark & Copyright, Tax

Get Advice

अंतरराष्ट्रीय कानून Related Questions

Discover clear and detailed answers to common questions about Breach of Contract. Learn about procedures and more in straightforward language.