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तलाक के लिए क्रूरता का आधार क्या है?

30-Oct-2026
तलाक

Answer By law4u team

भारतीय कानून के तहत हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) की धारा 13(1)(ia) के अंतर्गत क्रूरता (Cruelty) को तलाक का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रमुख आधार माना गया है। क्रूरता का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक प्रताड़ना भी पूरी तरह से शामिल है। कानून के अनुसार यदि विवाह के बाद पति या पत्नी में से कोई भी दूसरे पक्ष के साथ ऐसी क्रूरता का व्यवहार करता है जिसके कारण दूसरे पक्ष के मन में यह उचित भय या आशंका पैदा हो जाए कि उस जीवनसाथी के साथ रहना उसके जीवन या शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक या हानिकारक है, तो अदालत द्वारा तलाक की डिक्री दी जा सकती है। क्रूरता के विभिन्न रूपों को समझने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के कई महत्वपूर्ण फैसले मार्गदर्शक रहे हैं। अदालतें मानती हैं कि क्रूरता का कोई एक निश्चित पैमाना नहीं है और यह हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिर भी, इसे कुछ प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है जो तलाक के मुकदमे में आधार बनती हैं। 1. शारीरिक क्रूरता के अंतर्गत पति या पत्नी द्वारा दूसरे पक्ष को पीटना, उसे गंभीर शारीरिक चोट पहुँचाना, उस पर हमला करना या उसके शरीर को किसी प्रकार का नुकसान पहुँचाना शामिल है। एक बार की गंभीर हिंसा या लगातार होने वाली छोटी-छोटी मारपीट दोनों ही शारीरिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। 2. मानसिक क्रूरता के मामलों में लगातार अपमानित करना, सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना, गालियां देना, चरित्र पर झूठे और निराधार आरोप लगाना, किसी भी आधार पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और लगातार दुर्व्यवहार करना शामिल है। यदि कोई जीवनसाथी बार-बार आत्महत्या करने की धमकी देता है या मानसिक तनाव पैदा करता है, तो इसे भी मानसिक क्रूरता माना जाता है। 3. झूठे आपराधिक या दीवानी मुकदमे दर्ज कराना भी मानसिक क्रूरता का एक बहुत बड़ा आधार है। यदि पति या उसकी फैमिली के खिलाफ धारा 498ए (भारतीय दंड संहिता या नया भारतीय न्याय संहिता) या अन्य धाराओं के तहत झूठे, मनगढ़ंत और गंभीर मामले दर्ज कराए जाते हैं और अदालत में वे आरोप साबित नहीं हो पाते हैं, तो इसे दूसरे पक्ष के प्रति गंभीर मानसिक क्रूरता माना गया है, जिस आधार पर तलाक मिल सकता है। 4. जीवनसाथी की इच्छा के विरुद्ध या जबरन संबंध बनाना, या विवाहेतर संबंध (Adultery) रखना भी अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक क्रूरता पैदा करता है। यदि कोई पक्ष किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध रखता है और इसके पुख्ता सबूत अदालत में पेश किए जाते हैं, तो यह क्रूरता और व्यभिचार दोनों के आधार पर तलाक का मजबूत कारण बनता है। 5. वित्तीय उपेक्षा या आर्थिक क्रूरता भी इसमें शामिल होती है। यदि पति अपनी पत्नी या बच्चों का भरण-पोषण करने से जानबूझकर इनकार करता है, अपनी आय छुपाता है, या पत्नी को आर्थिक तंगी में जीने के लिए मजबूर करता है और उसे बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं करने देता, तो इसे भी क्रूरता माना जाता है। 6. पत्नी के मायके वालों के प्रति या पति के परिवार के सदस्यों के प्रति अत्यधिक और अनुचित अपमानजनक व्यवहार, या किसी एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को उसके परिवार से पूरी तरह अलग करने की कोशिश करना भी क्रूरता के दायरे में आता है। 7. मानसिक बीमारी या स्वास्थ्य से जुड़ी बातें छुपाकर शादी करना, या शादी के बाद जानबूझकर मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य की उपेक्षा करना भी क्रूरता का रूप ले सकता है। तलाक के मुकदमे में क्रूरता को साबित करने की जिम्मेदारी उस पक्ष पर होती है जो तलाक की मांग कर रहा है। इसके लिए वादी को अदालत में ठोस सबूत, जैसे कि मेडिकल रिपोर्ट्स, पुलिस शिकायतें, व्हाट्सएप चैट, ईमेल, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने होते हैं। अदालत केवल मौखिक बयों के आधार पर क्रूरता को स्वीकार नहीं करती, बल्कि साक्ष्यों की विश्वसनीयता की गहराई से जांच करती है। यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि क्रूरता का यह आधार पति और पत्नी दोनों को समान रूप से उपलब्ध है। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत कोई भी पति या पत्नी क्रूरता के आधार पर पारिवारिक न्यायालय (Family Court) में तलाक के लिए याचिका दायर कर सकता है। न्यायालय दोनों पक्षों की दलीलें और सबूत सुनने के बाद यह निर्णय लेता है कि क्या वास्तव में प्रताड़ना इतनी गंभीर थी कि वैवाहिक संबंध को आगे जारी रखना असंभव हो गया है। यदि क्रूरता साबित हो जाती है, तो अदालत विवाह विच्छेद (Dissolution of Marriage) का आदेश पारित कर देती है और साथ ही स्थायी गुजारा भत्ता (Permanent Alimony) और बच्चों की कस्टडी से जुड़े आदेश भी पारित किए जाते हैं।

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