Answer By law4u team
भारत में विवाह का पंजीकरण यानी मैरिज रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी, सामाजिक और व्यावहारिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। देश में लगभग सभी राज्यों ने विवाह का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार भी विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से आवश्यक है ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके और बाल विवाह तथा धोखाधड़ी जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सके। मैरिज रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है, इसके कई मुख्य कारण और कानूनी लाभ हैं। 1. कानूनी मान्यता और सुरक्षा: मैरिज रजिस्ट्रेशन आपके विवाह का आधिकारिक सरकारी प्रमाण है। जब आप मैरिज सर्टिफिकेट प्राप्त कर लेते हैं, तो कानून की नजर में आपका विवाह पूरी तरह वैध माना जाता है। किसी भी कानूनी विवाद की स्थिति में यह सर्टिफिकेट इस बात का ठोस सबूत होता है कि दोनों पक्षों के बीच वैध रूप से विवाह हुआ है। 2. पति-पत्नी के अधिकार और उत्तराधिकार: रजिस्ट्रेशन होने के बाद पति और पत्नी दोनों को एक-दूसरे की संपत्ति और उत्तराधिकार में कानूनी अधिकार मिल जाते हैं। यदि किसी दुर्भाग्यवश स्थिति में पति की मृत्यु हो जाती है और वसीयत नहीं है, तो पत्नी को पति की संपत्ति, पेंशन, ग्रेच्युटी और बीमा क्लेम प्राप्त करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं आती। इसी तरह बच्चों के उत्तराधिकार के मामलों में भी माता-पिता के विवाह का रजिस्टर्ड होना सुरक्षा प्रदान करता है। 3. पासपोर्ट, वीजा और इमिग्रेशन: आज के समय में विदेश यात्रा करने, पासपोर्ट बनवाने, स्पाउस वीज़ा यानी पति या पत्नी के आश्रित वीज़ा के लिए आवेदन करने और दूसरे देशों की नागरिकता या परमानेंट रेजिडेंसी के लिए आवेदन करने हेतु मैरिज सर्टिफिकेट सबसे पहली मांग होती है। विदेशी दूतावास और इमिग्रेशन विभाग बिना मैरिज सर्टिफिकेट के पति-पत्नी के रिश्ते को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं करते। 4. बैंक खाते, बीमा और सरकारी योजनाएं: विवाह के बाद बैंक खातों में नॉमिनी का नाम बदलने, जॉइंट अकाउंट खुलवाने, बीमा पॉलिसियों में पति या पत्नी का नाम दर्ज कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट की आवश्यकता पड़ती है। कई सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों में जीवनसाथी को मिलने वाले लाभों को प्राप्त करने के लिए यह एक अनिवार्य दस्तावेज है। 5. संपत्ति की खरीद-बिक्री और लोन: यदि पति और पत्नी मिलकर कोई अचल संपत्ति जैसे घर, जमीन या फ्लैट खरीदते हैं या होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो संयुक्त दस्तावेजों को पूरा करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट बहुत काम आता है। बैंक लोन स्वीकृत करते समय अक्सर विवाह के प्रमाण की मांग करते हैं। 6. बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल दाखिला: कई नगर निगमों और स्कूलों में बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवाते समय या स्कूल में एडमिशन कराते समय माता-पिता के विवाह प्रमाण पत्र की मांग की जाती है। यह बच्चे की वैध वंशावली को प्रमाणित करने में भी मदद करता है। 7. महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और घरेलू हिंसा से बचाव: मैरिज रजिस्ट्रेशन से महिलाओं को सुरक्षा मिलती है। यह उन मामलों में बहुत मददगार होता है जहां किसी महिला को उसके पति या ससुराल पक्ष द्वारा यह कहकर छोड़ने या पहचानने से इंकार किया जाता है कि उनका कोई विवाह ही नहीं हुआ था। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (HMA) या विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (SMA) के तहत पंजीकृत विवाह महिला को भरण-पोषण यानी मेंटेनेंस मांगने का मजबूत अधिकार देता है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (DV Act) के तहत कानूनी सहायता प्राप्त करने में भी यह प्रमाण पत्र सहायक होता है। 8. फर्जी विवाहों और धोखाधड़ी पर रोक: मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने से उन मामलों में कमी आती है जहां लोग अपनी पिछली शादी को छुपाकर दूसरा विवाह कर लेते हैं। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 82 के तहत द्विविवाह यानी पहले पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना एक दंडनीय अपराध है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच होती है जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश कम हो जाती है। भारत में विवाह का पंजीकरण दो मुख्य अधिनियमों के तहत कराया जा सकता है। यदि दोनों पक्ष हिंदू, जैन, बौद्ध या सिख समुदाय से हैं, तो वे हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत अपना विवाह पंजीकृत करा सकते हैं। इसके अलावा यदि विवाह करने वाले लोग अलग-अलग धर्मों के हैं या कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं, तो विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (SMA) का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त सभी राज्यों के अपने स्थानीय विवाह नियम और पंजीकरण अधिनियम भी हैं जिनके तहत आर्य समाज विवाह या अन्य रीति-रिवाजों से हुए विवाहों का रजिस्ट्रेशन कराया जाता है। रजिस्ट्रेशन न कराने पर कुछ राज्यों में जुर्माना का प्रावधान भी है, लेकिन इससे भी बड़ा नुकसान यह होता है कि आपातकालीन परिस्थितियों में अधिकारों को साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। इसलिए सभी वैवाहिक जोड़ों को सलाह दी जाती है कि विवाह संपन्न होने के तुरंत बाद अपने नजदीकी रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर विवाह का पंजीकरण अवश्य कराएं।